फर्जी जाति प्रमाण पत्र विवाद,पुरोला भाजपा ब्लॉक प्रमुख नितिशा शाह समेत प्रशासनिक प्रक्रिया जांच के दायरे में – myuttarakhandnews.com

पुरोला | पुरोला विकासखंड में पंचायत चुनाव के दौरान कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र के इस्तेमाल का मामला अब न्यायिक स्तर पर गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट, पुरोला ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 175(3) के तहत थाना पुरोला को FIR दर्ज कर मामले की विवेचना करने के आदेश दिए है।
नितिशा शाह पर गंभीर आरोप
प्राथमिक जांच के अनुसार भाजपा ब्लॉक प्रमुख नितिशा शाह पर आरोप है कि उन्होंने पंचायत चुनाव में आरक्षित पद का लाभ लेने के लिए अलग-अलग समय पर अनुसूचित जनजाति (ST) और अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया। वर्ष 2017 में अनुसूचित जनजाति का वैध प्रमाण पत्र पहले से मौजूद था, फिर 2025 में कथित रूप से गलत तथ्यों और शपथपत्र के आधार पर अनुसूचित जाति का नया प्रमाण पत्र प्राप्त किया गया।
न्यायालय ने FIR दर्ज कर स्पष्ट किया कि यदि जांच में प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए, तो कार्रवाई केवल नितिशा शाह तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शामिल प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होगी।
प्रशासनिक प्रक्रिया की भी होगी जांच
जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किए गए, कौन से अधिकारी ने संस्तुति दी, शपथपत्र की सत्यता की जांच हुई या नहीं, और शासनादेशों का पालन किया गया या नहीं। यदि यह पाया गया कि प्रमाण पत्र जानबूझकर या लापरवाही से जारी किए गए, तो संबंधित तहसील प्रशासन के अधिकारी भी सह-आरोपी बन सकते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव
प्रार्थिनी ने अदालत में कहा कि उन्होंने तहसील प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को शिकायतें दी थीं, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद न्यायालय की शरण ली गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला अब केवल चुनावी विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन गया है।खबर लिखे जाने तक नितिशा शाह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

Post Views: 1

Post navigation

About The Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Enable Notifications OK No thanks