उत्तराखंड में फॉरेस्ट फायर अलर्ट, 15 फरवरी से शुरू होगा अग्नि सीजन, हरे पेड़ों की कटाई तक का फैसला – पर्वतजन

देहरादून।
उत्तराखंड में जंगलों की आग को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी 15 फरवरी से फॉरेस्ट फायर सीजन की शुरुआत हो रही है, जो 15 जून तक चलेगा। आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग ने इस बार व्यापक और आक्रामक रणनीति अपनाई है, जिसमें फायर लाइन निर्माण के लिए हरे पेड़ों की कटाई का फैसला भी शामिल है।
 

राज्यभर में वन विभाग करीब 13 हजार किलोमीटर क्षेत्र में फायर लाइनों को दुरुस्त और विकसित करने का काम कर रहा है। फायर लाइन दरअसल जंगल के भीतर बनाई जाने वाली ऐसी खाली पट्टियां होती हैं, जहां पेड़-पौधे नहीं होते, ताकि आग एक इलाके से दूसरे इलाके में न फैल सके। हालांकि, कई स्थानों पर इन फायर लाइनों के चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण के लिए हरे पेड़ों को चिन्हित कर काटने की तैयारी की गई है।
 
उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल है, जहां हर साल जंगल की आग बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाती है। लाखों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होता है, जैव विविधता को भारी क्षति होती है और कई बार जनहानि की घटनाएं भी सामने आती हैं। इसी कारण राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर भी जंगल की आग को लेकर बार-बार चर्चा में रहता है।
 
इस बार की तैयारी को अलग बनाता है बहु-विभागीय समन्वय। वन विभाग अकेले इस चुनौती से नहीं निपटेगा। करीब 20 से अधिक विभागों को इस अभियान से जोड़ा गया है, जिनमें आपदा प्रबंधन, पुलिस, राजस्व, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, ऊर्जा विभाग और स्थानीय प्रशासन शामिल हैं। सभी के बीच समन्वय स्थापित कर आग से निपटने की साझा रणनीति बनाई जा रही है।
 
इसी क्रम में 13 फरवरी को राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य फायर सीजन शुरू होने से पहले तैयारियों की वास्तविक स्थिति को परखना और कमियों को समय रहते दूर करना है। वन विभाग के अनुसार 15 फरवरी से 15 जून का समय सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है, जब गर्मी, सूखी पत्तियां और पहाड़ी इलाकों में तेज हवाएं आग को तेजी से फैलाती हैं।
 
वन विभाग का कहना है कि कई इलाकों में पुरानी फायर लाइनें झाड़ियों और पेड़ों से पूरी तरह ढक चुकी हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा प्रभावी बनाने के लिए चिन्हित पेड़ों को हटाना जरूरी हो गया है। विभाग का दावा है कि कटाई केवल आवश्यकता के अनुसार ही की जाएगी और बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।
 
तैयारियों के तहत इस बार फायर स्टेशन, उपकरण और कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जंगल की आग से जूझने वाले कर्मियों के लिए बीमा कवर, सुरक्षा गियर और प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में अस्थायी अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती भी की जाएगी, ताकि आग लगते ही त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।
 
तकनीक का भी इस अभियान में अहम रोल रहेगा। सैटेलाइट आधारित अलर्ट सिस्टम, ड्रोन सर्विलांस और रियल टाइम फायर मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाओं को सक्रिय किया जा रहा है, ताकि आग की सूचना तुरंत मिल सके और नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
 
बजट को लेकर भी इस बार विभाग पहले से सतर्क है। आपदा मद के साथ-साथ राज्य सरकार और विभागीय संसाधनों से सभी वन डिवीजनों को उनकी मांग के अनुसार पहले ही बजट जारी कर दिया गया है। लक्ष्य साफ है कि फॉरेस्ट फायर सीजन के दौरान पैसों की कमी किसी भी स्तर पर बाधा न बने।p

Sapna Rani

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