वीडियो बनाते ही फॉरेस्ट अफसर पर हमला, क्रॉस मुकदमे दर्ज – पर्वतजन

उत्तराखंड में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर हुए हमले का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि देहरादून जनपद के विकासनगर क्षेत्र से सरकारी अधिकारियों के साथ मारपीट की एक और घटना सामने आ गई है। इस बार विवाद वन विभाग की टीम के साथ हुआ, जिसका वीडियो भी सामने आया है। प्रकरण में दोनों पक्षों की शिकायत पर पुलिस ने अलग-अलग अभियोग दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
 
चकराता वन प्रभाग, कालसी के उप प्रभागीय वनाधिकारी राजीव नयन नौटियाल ने कोतवाली विकासनगर को दी तहरीर में बताया कि 27 फरवरी की शाम लगभग 5:30 बजे वह अपने कार्यालय कालसी से लौट रहे थे। बड़वाला क्षेत्र में हरिपुर से यमुना नदी की ओर जा रहे एक डंपर की गतिविधि संदिग्ध प्रतीत होने पर उन्होंने उसका वीडियो बनाना शुरू किया। आरोप है कि वहां मौजूद कुछ व्यक्तियों ने इसका विरोध किया और हाथापाई करते हुए शासकीय कार्य में व्यवधान डाला।

 
पुलिस ने प्राप्त शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 115(2), 352, 324(2), 121(1), 132 और 191(2) के अंतर्गत मामला पंजीकृत किया है।
 
दूसरी ओर, बड़वाला निवासी मनीष चौहान की ओर से भी प्रतिवाद दायर किया गया है। उनकी तहरीर पर बीएनएस की धाराओं 115(2), 324(2), 351(3), 352 तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(द) और 3(1)(ध) के तहत अभियोग दर्ज किया गया है।
 
एसपी ग्रामीण पंकज गैरोला ने जानकारी दी कि दोनों पक्षों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। विवेचना के दौरान जो तथ्य सामने आएंगे, उसी अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
 
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब खनन से प्राप्त राजस्व में बेहतर प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके समानांतर अवैध खनन की शिकायतें और निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के साथ टकराव की घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।
 
इसी क्षेत्र में हाल ही में खनन से जुड़े एक डंपर द्वारा वन गुर्जर समुदाय की कई भैंसों को कुचल दिए जाने की भी सूचना है, जिससे पशुपालकों को गंभीर आर्थिक नुकसान हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण दिखाई नहीं दे रहा।
 
यमुना घाटी और विकासनगर इलाके में लंबे समय से अवैध खनन को लेकर शिकायतें मिलती रही हैं। विशेष रूप से रात्रिकालीन गतिविधियों और भारी वाहनों की निरंतर आवाजाही पर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व में वन एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त कार्रवाई कर कई वाहनों को सीज किया जा चुका है, फिर भी पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है।
 
सरकारी अमले पर कार्रवाई के दौरान हमले की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। अधिकारियों का मत है कि ऐसे मामलों में त्वरित प्राथमिकी और कठोर दंडात्मक कदम आवश्यक हैं। साथ ही, अभियान के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की मांग भी उठ रही है।
 
खनन से आय में वृद्धि और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाना फिलहाल प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है।

Sapna Rani

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