सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति जीरो टॉलरेंस: शस्त्रों के दुरुपयोग पर जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई
नैनीताल : जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल के निर्देश पर जनपद में शस्त्रों के दुरुपयोग एवं आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए गए व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए चार शस्त्र अनुज्ञप्तियां निरस्त कर दी गई हैं। वहीं परीक्षण एवं अभिलेखों के आधार पर चार अन्य मामलों में शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही समाप्त कर दी गई है।
जिला अधिकारी कार्यालय से प्राप्त सूचना अनुसार त्रिभुवन चंद पुत्र बसंत बल्लभ, निवासी पोस्ट ऑफिस के पीछे, काठगोदाम द्वारा अपने लाइसेंसी पिस्टल से वाहन संख्या UK04-3233 में बैठकर सार्वजनिक स्थल पर फायरिंग किए जाने का मामला प्रकाश में आया था। शस्त्र का सार्वजनिक स्थल पर दुरुपयोग पाए जाने पर आयुध अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत उनकी शस्त्र अनुज्ञप्ति निरस्त कर दी गई।
इसी प्रकार कोतवाली रामनगर में दर्ज प्राथमिकी में यह तथ्य सामने आया कि उमेश बेलवाल ने अपने भाई ललित बेलवाल की लाइसेंसी डबल बैरल बंदूक का उपयोग कर वादी पर हमला किया। पुलिस द्वारा उमेश बेलवाल के कब्जे से उक्त लाइसेंसी बंदूक बरामद की गई। जिला प्रशासन ने माना कि शस्त्र धारक द्वारा अपने लाइसेंसी हथियार की सुरक्षा एवं नियंत्रण सुनिश्चित करना उसकी वैधानिक जिम्मेदारी है। ऐसे में, ललित बेलवाल के उच्च सैन्य सम्मान प्राप्त होने के बावजूद शस्त्र के दुरुपयोग की घटना को गंभीर मानते हुए उनके नाम निर्गत शस्त्र लाइसेंस को निरस्त कर दिया गया।
इसके अतिरिक्त, आपराधिक अभियोगों में पंजीकृत पाए जाने के आधार पर इश्तियाक अली पुत्र दिलावर अली, निवासी लाइन नंबर-18, बनभूलपुरा तथा मोहम्मद सलीम पुत्र अब्दुल वाहिद, निवासी इंदिरा नगर, बनभूलपुरा के पक्ष में जारी शस्त्र अनुज्ञप्तियां भी निरस्त कर दी गई हैं।
वहीं, उपलब्ध अभिलेखों एवं तथ्यों के परीक्षण के उपरांत सतीश नैनवाल पुत्र चंद्र दत्त (थाना बेतालघाट), निसार सिद्दीकी पुत्र इकबाल हुसैन (बनभूलपुरा), शाहनवाज मलिक पुत्र मोहम्मद अशफाक (बनभूलपुरा) तथा अदनान नवाब पुत्र इक्तेदार उल्लाह (बनभूलपुरा) के विरुद्ध लंबित शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही समाप्त कर दी गई है।
जिला अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि शस्त्र अनुज्ञप्ति एक विशेष वैधानिक अधिकार है, जिसका प्रयोग पूर्ण उत्तरदायित्व एवं कानून के दायरे में रहकर किया जाना अनिवार्य है। सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा शस्त्रों के दुरुपयोग के मामलों में प्रशासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जारी रहेगी तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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