

MBBS Admission 2026 | NEET UG Counselling 2026 : नीट यूजी काउंसलिंग की प्रक्रिया जारी है। इस बीच उत्तराखंड सरकार ने नीट यूजी काउंसलिंग-1 में हुए एडमिशन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। जिन उम्मीदवारों को पहले राउंड में मेडिकल सीट मिली है, उनमें से कुछ उम्मीदवारों को अपनी सीट से हाथ धोना पड़ सकता है। न सिर्फ MBBS एडमिशन रद्द हो सकता है, बल्कि कानूनी कार्रवाई का भी सामना कर सकता है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को नीट यूजी काउंसलिंग राउंड-1 में हुए उम्मीदवारों के दाखिला की जांच के दायरे को बढ़ाने का निर्देश दिया है। पहले सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी आश्रित आरक्षण को लेकर जांच के आदेश दिए गए थे। अब इसमें अन्य आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को भी शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
क्या है मामला?दरअसल, हाल ही में उत्तराखंड नीट काउंसलिंग राउंड 1 में फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर एमबीबीएस सीट लेने के मामले सामने आए हैं। अब तक फर्जी डॉक्यूमेंट्स के आधार पर 8 उम्मीदवारों की पहचान की गई है। अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती शिकायतों में फर्जी स्वतंत्रता सेनानी आश्रित सर्टिफिकेट शामिल थे, लेकिन अन्य आरक्षण श्रेणियों में संभावित दस्तावेज धोखाधड़ी को लेकर बढ़ते संदेह के कारण राज्य प्राधिकरण को जांच का दायरा बढ़ाना पड़ा है।
मेडिकल एडमिशन रद्द के साथ हो सकती है कार्रवाईमुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, अधिकारी अब सभी रिजर्व कैटेगरी में जमा किए गए डॉक्यूमेंट्स की जांच और वेरिफिकेशन करेंगे। बयान में कहा गया है कि जांच के दौरान कोई भी फर्जी दस्तावेज मिलने पर उसे रद्द कर दिया जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। भले ही उम्मीदवार का का नीट स्कोर कितना ही अच्छा क्यों न हो। CMO ने यह भी पुष्टि की है कि आठ उम्मीदवारों के सर्टिफिकेट रद्द कर दिए गए हैं और उनकी एडमिशन प्रक्रिया भी रद्द हो गई है।
सीएम पुष्कर धामी ने यह पता लगाने का भी आदेश दिया है कि ये फर्जी दस्तावेज कैसे जारी किए गए और दोषियों की पहचान की जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस कथित रैकेट में शामिल पाए जाने वाले किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को गंभीर अनुशासनात्मक और कानूनी परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए एडमिशन हासिल करने का अपराध उतना ही गंभीर है जितना कि परीक्षा में नकल करने का अपराध। जैसे ही यह मामला सामने आया, अधिकारियों को पारदर्शी जांच करने और कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब सभी श्रेणियों के सर्टिफिकेट की जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुष्कर धामी, मुख्यमंत्री, उत्तरखंडसीएम ने जोर दिया कि भविष्य के एडमिशन साइकिल में ऐसे मामलों को रोकने के लिए राज्य भर में दस्तावेज सत्यापन प्रक्रियाओं को काफी सख्त बनाया जाएगा। इससे पहले चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून के जिलाधिकारी को जांच करने और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था।
बता दें कि उत्तराखंड नीट यूजी काउंसलिंग-1 की प्रक्रिया 13 अगस्त से 5 सितंबर 2026 तक चली थी। वहीं राउंड-2 की प्रक्रिया 7 सितंबर से शुरू हुई थी और कॉलेज रिपोर्टिंग की आखिरी तारीख 19 सितंबर थी। दोनों राउंड के बाद खाली सीटों के आधार पर मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा। इससे पहले अब तक एडमिशन ले चुके उम्मीदवारों के डॉक्यूमेंट्स चेक और वेरिफाई किए जाएंगे।



