देहरादून। राजधानी देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए परियोजना के खर्च और निर्माण प्रक्रिया का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस ने कहा कि सैन्यधाम किसी सरकार या राजनीतिक दल की उपलब्धि नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों और शहीदों की स्मृति एवं सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में इसके निर्माण में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग के अध्यक्ष कर्नल रामरतन नेगी ने सैन्यधाम के निर्माण में हो रही देरी और परियोजना की बढ़ती लागत को लेकर सरकार से कई सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में सैन्यधाम की घोषणा की गई थी। जनवरी 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसका शिलान्यास किया, जबकि दिसंबर 2021 में तत्कालीन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुनियालगांव में सैन्यधाम का दूसरा शिलान्यास किया था।कांग्रेस के अनुसार, उस समय परियोजना की लागत करीब 63 करोड़ रुपये बताई गई थी और इसे लगभग दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। सैन्यधाम के लिए आयोजित शहीद सम्मान यात्रा के दौरान 1,734 शहीद परिवारों के आंगन की पवित्र मिट्टी भी एकत्र की गई थी।लागत बढ़ने पर कांग्रेस ने मांगा जवाबकर्नल नेगी ने कहा कि बाद के वर्षों में सैन्यधाम की लागत को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2022 में लागत करीब 48 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि वर्ष 2024 में सामने आई रिपोर्टों में यह राशि बढ़कर करीब 99 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात कही गई।कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर परियोजना की लागत में इतनी बड़ी वृद्धि किन कारणों से हुई? मूल डीपीआर क्या थी, संशोधित डीपीआर कब और क्यों स्वीकृत की गई तथा अतिरिक्त धनराशि को किस प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई? पार्टी ने सरकार से इन सवालों का सार्वजनिक रूप से जवाब देने की मांग की है।कर्नल नेगी ने मूल एवं संशोधित डीपीआर, वित्तीय स्वीकृतियों, टेंडर दस्तावेज, वर्क ऑर्डर, अतिरिक्त कार्यों की मंजूरी, अब तक किए गए भुगतान और गुणवत्ता जांच से संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।‘दो साल में पूरा होना था, अब तक क्यों नहीं हुआ’कांग्रेस ने निर्माण में देरी को लेकर भी सरकार को घेरा। कर्नल नेगी ने कहा कि वर्ष 2021 में सैन्यधाम को करीब दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। ऐसे में सवाल उठता है कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी परियोजना पूरी क्यों नहीं हो सकी और देरी के लिए आखिर जिम्मेदारी किसकी तय की गई?‘सैन्यधाम चुनावी उपलब्धि नहीं, शहीदों का सम्मान’सैन्यधाम के प्रभारी मंत्री गणेश जोशी के कथित ‘चुनावी लाभ’ संबंधी बयान को लेकर भी कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। कर्नल नेगी ने कहा कि सैन्यधाम को किसी राजनीतिक दल की चुनावी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करना शहीदों और सैनिकों के सम्मान के अनुरूप नहीं है।उन्होंने कहा कि सैन्यधाम देश के वीर सैनिकों और शहीद परिवारों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। कांग्रेस ने मंत्री गणेश जोशी के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।‘शहीदों की मिट्टी किसी दल की संपत्ति नहीं’कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुजाता पॉल ने कहा कि सैन्यधाम में लाई गई शहीद परिवारों के आंगन की मिट्टी किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। सैनिक की निष्ठा किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति नहीं, बल्कि देश और भारत माता के प्रति होती है।उन्होंने कहा कि शहीदों की शहादत और उनकी पवित्र मिट्टी को राजनीतिक लाभ से जोड़ना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।कांग्रेस के पूर्व सैनिक विभाग ने कहा कि सैन्यधाम से जुड़े खर्च, निर्माण की पारदर्शिता, शहीदों के सम्मान और सैन्य परिवारों के अधिकारों के मुद्दे को वह आगे भी लगातार उठाता रहेगा।
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