देहरादून/नैनीताल। माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के तत्वाधान में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का रविवार, 12 अप्रैल 2026 को भव्य समापन हो गया। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” तथा मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” रही।
समापन सत्र में माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, भारत सरकार के कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
सम्मेलन में राज्य के सभी जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न तकनीकी सत्रों में न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने, वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण तथा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
सम्मेलन के दौरान वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास तथा महिलाओं एवं बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। वहीं, नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ द्वारा ई-बुकलेट का विमोचन भी किया गया।
राज्यपाल ने एंटी-ड्रग जागरूकता वीडियो का शुभारंभ करते हुए युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचाने हेतु किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में लोक अदालत, मध्यस्थता, नालसा पोर्टल एवं हेल्पलाइन सेवाओं के माध्यम से न्याय को आमजन तक पहुँचाने के प्रयासों को भी रेखांकित किया गया।
इसके अतिरिक्त, दूरस्थ क्षेत्रों में विधिक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के लिए यूटिलिटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
सम्मेलन को न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ एवं मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया, जो समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों तक न्याय की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने में सहायक सिद्ध होगा।
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