ग्लोकल यूनिवर्सिटी का परिसर 12 नवम्बर 2025 को आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह से भर उठा, जब तीन दिवसीय “सुदीप्तम् 2025 – आयुष ग्लोबल कॉन्क्लेव” का शानदार उद्घाटन हुआ। ठीक दोपहर 12 बजे सभी विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ समारोह का शुभारंभ किया गया। तत्पश्चात् डॉ. आशी एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण ने पूरे वातावरण में दिव्यता एवं सकारात्मकता का संचार कर दिया।
उद्घाटन समारोह में स्वागत भाषण डॉ. पी. गौरीशंकर (जनरल कन्वीनर, सुदीप्तम् 2025 एवं डीन रिसर्च, ग्लोकल यूनिवर्सिटी) ने प्रस्तुत किया। इसके बाद विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) जॉन फिनबे ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आयुष प्रणाली की वैश्विक उपयोगिता और समसामयिक युग में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अतुल बाबू वर्श्नेय (सदस्य, बोर्ड ऑफ आयुर्वेद, एनसीआईएसएम, नई दिल्ली) ने अपने प्रेरणादायी उद्घाटन भाषण में आयुर्वेद के समन्वित विकास और युवा वैद्यों में अनुसंधान-आधारित दृष्टिकोण की अनिवार्यता पर विशेष जोर दिया।
इसके उपरांत आयोजित “आशीर्वचन सत्र” में श्री सैयद निजामुद्दीन (माननीय अतिरिक्त प्रो-चांसलर) एवं प्रो. शिवानी तिवारी (माननीय रजिस्ट्रार, ग्लोकल यूनिवर्सिटी) ने सभा को अपने मंगल संदेश एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं।
सम्मान समारोह ने बढ़ाया गौरव
कार्यक्रम की विशेष आकर्षण रहा सम्मान समारोह, जिसमें आयुष क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया—
मुख्य अतिथि डॉ. अतुल बाबू वर्श्नेय को सम्मान-चिह्न प्रदान किया गया।
डॉ. शिशिर प्रसाद को मर्म चिकित्सा में उत्कृष्टता हेतु “सुदीप्त वैद्य” सम्मान से अलंकृत किया गया।
डॉ. प्रसान्त आर. कृष्णा को आयुर्वेदिक अकादमिक लीडरशिप एक्सीलेंस अवार्ड से सम्मानित किया गया।
समारोह का औपचारिक समापन डॉ. अनुप कुमार के. (प्राचार्य इंचार्ज, ग्लोकल कॉलेज ऑफ आयुर्वेदिक मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।
पहले दिन के शैक्षणिक सत्र—ज्ञान का समृद्ध प्रवाह
कॉन्क्लेव के पहले दिन eminent experts ने विभिन्न सत्रों में उल्लेखनीय व्याख्यान प्रस्तुत किए—
प्रातः सत्र में डॉ. आनंदरामन शर्मा (एआईआईए, नई दिल्ली) ने गहन विश्लेषण और शोधपरक विचार साझा किए।
दोपहर में डॉ. अजय सादानंदम (केयूएचएस, केरल) ने विषयगत प्रस्तुति के माध्यम से प्रतिभागियों को नई दिशा प्रदान की।
शाम के सत्र में डॉ. राजा सिंगला (श्री कृष्ण आयुष यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र) ने अपने ज्ञानवर्धक विचारों से श्रोताओं को लाभान्वित किया।
आयुष के उज्ज्वल भविष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम
“सुदीप्तम् 2025” न केवल आयुष चिकित्सा प्रणाली के समग्र विकास का उत्सव है, बल्कि वैश्विक सहयोग, आधुनिक अनुसंधान और परंपरागत चिकित्सा ज्ञान के संगम का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। यह आयोजन आयुर्वेद के उजाले भविष्य की दिशा में एक प्रेरक और सार्थक पहल सिद्ध हो रहा है।
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