उत्तराखंड में बीते एक महीने से सियासी माहौल लगातार गरमाया हुआ है। प्रदेश की राजनीति इन दिनों कई संवेदनशील मुद्दों के इर्द-गिर्द घूम रही है, जिन पर विपक्ष सरकार को लगातार कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। इन तमाम मुद्दों के केंद्र में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड है, जिसे लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा सीबीआई जांच की मांग तेज़ होती जा रही है।
इस मामले पर अब तक भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री प्रेस वार्ताओं के माध्यम से सरकार का पक्ष रख चुके हैं। इसी कड़ी में मंगलवार दोपहर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं प्रेस वार्ता को संबोधित करने जा रहे हैं, जिसे राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
दरअसल, अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और कथित वीआईपी के नाम को लेकर उठ रहे सवालों के कारण भाजपा और राज्य सरकार असहज स्थिति में दिखाई दे रही है। मुख्य विपक्षी दल प्रदेश के सभी जिलों में प्रदर्शन कर इस मुद्दे को लगातार हवा दे रहा है। वहीं, भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर से जुड़े कथित ऑडियो क्लिप, जो उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर द्वारा सामने लाए गए बताए जा रहे हैं, के वायरल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल और तेज हो गई है। हालांकि, वायरल ऑडियो को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं और इसे कथित वीआईपी विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा संगठन की ओर से अब तक तीन प्रमुख नेताओं ने प्रेस वार्ता की है। सबसे पहले विधायक खजान दास ने पार्टी का पक्ष रखा, इसके बाद कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने सरकार की स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। वहीं, हाल ही में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने भी प्रेस वार्ता कर अंकिता भंडारी मामले में सरकार और संगठन की राय सामने रखी। हालांकि, इन सभी प्रेस वार्ताओं के दौरान पत्रकारों के तीखे सवालों के आगे नेताओं को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा और कई अहम सवालों पर संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाए।
दूसरी ओर, इस मामले में नाम जोड़े जाने के बाद भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि याचिका दायर की है। उन्होंने विपक्ष पर उनकी छवि धूमिल करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही देहरादून के डालनवाला थाने में बीएनएस और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी भी दर्ज की गई है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद, जिनमें भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर का नाम जुड़ा है, पार्टी के भीतर भी बेचैनी साफ नजर आ रही है। हालात यहां तक पहुंच गए कि कुछ ही दिनों के भीतर भाजपा के तीन नेताओं ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
सबसे पहले पूर्व जिला पंचायत सदस्य आरती गौड़ ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देते हुए सीबीआई जांच की मांग की। इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी ने भी पार्टी छोड़ दी। उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा कि अंकिता को अब तक न्याय नहीं मिल पाया है और यह मामला उत्तराखंड की जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है। इसके बाद ऋषिकेश से भाजपा युवा मोर्चा के जिला मंत्री अंकित बनखंडी ने भी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को इस्तीफा सौंपते हुए उर्मिला सनावर, सुरेश राठौर और यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट की जांच की मांग की।
ऐसे हालात में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रस्तावित प्रेस वार्ता पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं। प्रदेशभर में चल रहे सीबीआई जांच के प्रदर्शनों को देखते हुए यह अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि मुख्यमंत्री इस मामले में कोई बड़ा फैसला या घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट मुख्यमंत्री की प्रेस वार्ता के बाद ही हो पाएगी।
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