
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज उत्तराखंड जा रहे हैं, लेकिन चर्चा पश्चिम बंगाल में भी हो रही होगी. दरअसल, पीएम डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना करने वाले हैं. देहरादून-सहारनपुर बॉर्डर पर स्थित मां के इस मंदिर की विशेष मान्यता है. लोग मां काली का आशीर्वाद लेकर ही देहरादून में प्रवेश करते हैं. इन्हें ‘वाहन देवी’ भी कहते हैं. पीएम एलिवेटेड रोड से सफर कर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का शुभारंभ करेंगे. उधर, बंगाल में चुनाव का सीजन है और वहां मां काली आस्था, संस्कृति और शक्ति का सर्वोच्च प्रतीक मानी जाती हैं. लोग जयकारा भी ऐसे लगाते हैं- जय मां काली कलकत्ते वाली. जब पीएम उत्तराखंड में जयकारा लगाएंगे, तो गूंज कोलकाता में भी सुनाई देगी. इसकी अपनी वजह है.
राजनीतिक चर्चा के बीच यह जानना जरूरी है कि मां काली कैसे बंगाल की चेतना में रची-बसी हैं. कम लोगों को पता होगा कि बंगाल की राजधानी कोलकाता (कलकत्ता) का कालीघाट शक्तिपीठ, मां के 51 शक्तिपीठों में से एक है. यहां पर सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था. यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है और मां की अत्यंत उग्र प्रतिमा विराजमान है.
इस मंदिर में नूडल्स-चाऊमीन का भोगइसके अलावा दक्षिणेश्वर काली मंदिर रामकृष्ण परमहंस से जुड़ा है. एक चाइनीज काली मंदिर भी है, जहां मां काली को प्रसाद के रूप में नूडल्स और चाऊमीन का भोग लगाया जाता है. यहां चीनी समुदाय के लोग पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने पहुंचते हैं. पीएम जब भी बंगाल में होते हैं, मौका मिलने पर मां काली का दर्शन करने जरूर पहुंचते हैं. पिछले साल सितंबर में वह चितरंजन पार्क (दिल्ली) में काली बाड़ी मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे. (ऊपर तस्वीर उसी समय की है)
मां काली के नाम पर पड़ा कोलकाताहां, कोलकाता शहर का नाम भी मां काली के नाम पर ही पड़ा है. कोलकाता का नाम मूल रूप से बांग्ला शब्द ‘कोलिकाता’ से लिया गया है, जो हुगली नदी के किनारे बसे तीन गांवों में से एक था. वो गांव थे- सुतानुती, गोबिंदपुर और कालीकाता या कोलिकाता. यह नाम मां काली के क्षेत्र या ‘कालीक्षेत्र’ से प्रेरित माना जाता है. सबसे प्रचलित मान्यता यह है कि ‘कोलिकाता’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘कालीक्षेत्र’ (देवी काली का मैदान) से हुई है. 1690 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की तरफ से कालीकाता समेत तीन गांवों को मिलाकर एक व्यापारिक केंद्र स्थापित किया गया, जिसे बाद में कलकत्ता कहा गया. कुछ विद्वान यह भी कहते हैं कि यह नाम ‘कोलिकाता’ से आया है, जो एक प्राचीन गांव था.
कोलिकाता का उच्चारण नहीं कर पाते थे अंग्रेजअंग्रेजों के लिए ‘कोलिकाता’ का उच्चारण करना कठिन हो रहा था, इसलिए उन्होंने इसे ‘कलकत्ता’ (Calcutta) नाम दे दिया. हालांकि, जनवरी 2001 में, इसे आधिकारिक रूप से वापस मूल बंगाली नाम ‘कोलकाता’ कर दिया गया. दुर्गा पूजा की तरह बंगाल में मां काली की पूजा भी धूमधाम से की जाती है. पश्चिम बंगाल में काली मां की पूजा रक्षा काली (महामारी से सुरक्षा करने वाली देवी), श्मशान काली और भद्रकाली के रूप में की जाती है. ऐसे में पीएम की पूजा की खबरें और तस्वीरें जब बंगाल पहुंचेंगी, तो टीएमसी और दूसरे दलों को यह जरूर लगेगा कि कहीं उनका वोट बैंक ना खिसक जाए.
