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उत्तराखंड: मदरसों को मान्यता के लिए भूमि स्वामित्व जरूरी, 456 में से केवल 182 के पास ही अपनी जमीन – myuttarakhandnews.com

देहरादून। उत्तराखंड में पंजीकृत 456 मदरसों में से अभी तक केवल 182 के पास ही भूमि के स्वामित्व की जानकारी सामने आई है। इनमें शिक्षा विभाग से मान्यता लेकर पहले से चल रहे 170 मदरसे हैं, जबकि 12 की संपत्ति उत्तराखंड वक्फ बोर्ड में दर्ज है।
उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद सभी मदरसों को प्राधिकरण से मान्यता के साथ ही शिक्षा विभाग से संबद्धता लेनी अनिवार्य है। इसमें भूमि का स्वामित्व शिक्षण संस्थान के रूप में संचालित होने वाले मदरसे के नाम होना अहम शर्त है। ऐसे में शेष 274 मदरसों को यदि अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान के तौर पर जूनियर हाईस्कूल व इंटर कालेज के रूप में संचालित करना है तो उन्हें मान्यता व संबद्धता के लिए भूमि संबंधी दस्तावेज को आवेदन के साथ देना हाेगा।
नई व्यवस्था के तहत अब सभी मदरसों को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के पोर्टल पर आवेदन करते हुए अपनी भूमि, भवन और अन्य संपत्तियों का पूरा विवरण देना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण के कोई भी मदरसा प्राधिकरण का हिस्सा नहीं माना जाएगा। पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित मदरसों के पास भूमि का वैध स्वामित्व है या नहीं। सरकार ने एक जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसके सभी अधिकार और दायित्व उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण में निहित किए हैं। प्राधिकरण अब मदरसों की मान्यता, निरीक्षण, नवीनीकरण और नियमन का कार्य करेगा।
अल्पसंख्यक स्कूल की पात्रता के मानदंडप्राप्त आवेदन की समीक्षा के दौरान संस्थान की अल्पसंख्यक पहचान, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति, स्टाफ की योग्यता तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता का परीक्षण किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर भौतिक निरीक्षण भी कराया जा सकेगा।
मान्यता की वैधता एवं नवीनीकरणप्रत्येक अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान को दी जाने वाली मान्यता तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए वैध होगी। नवीनीकरण के लिए अवधि समाप्त होने से कम से कम तीन माह पूर्व आवेदन करना अनिवार्य रहेगा। नियमावली के तहत मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों को अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों के रूप में मान्यता उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की ओर से प्रदान की जाएगी।
”सभी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्राधिकरण आवश्यक जांच और निरीक्षण की प्रक्रिया भी अपनाएगा। भूमि का स्वामित्व आवेदन में प्रमुखता से बताना होगा। प्राप्त आवेदनों की पड़ताल गहनता से की जाएगी।”- डा. सुरजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष, उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण

Nandni sharma

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