देहरादून। प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, सप्तमी तिथि को श्री केदारनाथ धाम के कपाट खुलने पर श्रृद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि
चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु क्लाइमेटाईजेशन (climatization) का ध्यान अवश्य रखें। क्यों जल्दबाजी में यात्रा करना स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव डाल सकता है।
प्रदेश के पर्यटन, धर्मस्व, संस्कृति, लोक निर्माण, सिंचाई एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद कल गुरुवार को श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड स्थित चारों धामों की यात्रा विधिवत् रुप से प्रारंभ हो जायेगी। उन्होंने कहा कि श्री केदारनाथ धाम बारह ज्योतिर्लिंग और पंच केदार में सबसे प्रमुख है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडव गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति के लिए शिव को खोज रहे थे। शिव बैल बनकर गुप्तकाशी में छुप गए। भीम ने पहचान लिया तो शिव जमीन में धंसने लगे। भीम ने पीठ पकड़ ली–वही हिस्सा केदारनाथ में प्रकट हुआ। जबकि तुंगनाथ में उनकी बाहें, रुद्रनाथ में मुख, मध्यमहेश्वर में नाभि, कल्पेश्वर में जटा निकली। इसीलिए भगवान केदारनाथ जी के कपाट खुलने के साथ ही पंच केदार यात्रा का भी शुभारंभ हो जाता है।
पर्यटन, धर्मस्व एवं संस्कृति मंत्री महाराज ने कहा कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने चारधाम यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरह से रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की है।
ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए कुल 70 काउंटर बनाने गये हैं। इनमें 30 काउंटर ऋषिकेश में, 20 काउंटर हरिद्वार और 20 काउंटर विकासनगर में स्थापित किए गये हैं। ये सभी काउंटर दिन-रात यानी पूरे 24 घंटे काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी यात्री को परेशानी न हो। रजिस्ट्रेशन स्थलों पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सरकार ने पर्याप्त इंतजाम किए हैं। यात्रा मार्ग पर सार्वजनिक शौचालय और पीने के पानी के पर्याप्त इंतजाम के साथ-साथ मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार अधिकारियों को चारधाम यात्रा रूट पर मुख्य मार्गो और वैकल्पिक मार्गो को भी ठीक रखने के निर्देश दिए गए हैं। चारधाम यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले हर वाहन के ट्रिप कार्ड पर यात्रियों और चालक की जानकारी के साथ-साथ टूर आपरेटर या वाहन मालिक का नाम, मोबाइल नंबर और लाइसेंस नंबर दर्ज करने को कहा गया है।
उन्होंने श्रृद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में चारधाम यात्रा पर आने का अनुरोध करते हुए कहा कि श्रृद्धालु चारधाम यात्रा के दौरान क्लाइमेटाईजेशन (climatization) का विशेष ध्यान रखें। क्यों जल्दबाजी में यात्रा करना स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव डालता है। धीरे-धीरे ऊंचाई की तरफ बढ़ें, रास्ते में पड़ने वाले प्राकृतिक नजारों का आनंद लेते हुए पौराणिक तीर्थों और मंदिरों के दर्शनों का लाभ उठायें। तभी आपकी यात्रा सफल और यादगार रहेगी। उन्होंने कहा कि चारों धाम दस से बारह हजार फीट की ऊंचाई पर हैं। मैदान से सीधे वहां पहुंचने पर एक्यूट माउंटेन सिकनेस(Acute Mountain Sickness) के कारण सिरदर्द, उल्टी, सांस फूलना आदि समस्या हो सकती है। इसलिए हर 2-3 हजार फीट पर 1 दिन अवश्य रुकें। इससे शरीर ऑक्सीजन के लेवल का आदी हो जाएगा और यात्रा सुगम एवं सुरक्षित रहेगी।
महाराज ने कहा कि श्रृद्धालु यात्रा के दौरान होम स्टे में रुक कर उत्तराखण्ड के भोजन मंडुए की रोटी, गहत की दाल, चौसा, फाणू, पहाड़ी सब्जी–हल्के और सुपाच्य भोजन का लाभ भी उठा सकते हैं। यात्रा के दौरान उन्हें अपना QR कोड वाला रजिस्ट्रेशन और आधार कार्ड अवश्य साथ रखना चाहिए।
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