देहरादून। तेजी से फैलते शहर, बढ़ते ट्रैफिक दबाव और सिकुड़ते हरित क्षेत्र के बीच राजधानी के अगले डेढ़ दशक की दिशा तय करने वाला मास्टर प्लान-2041 अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है।
मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने शनिवार को उच्चस्तरीय बैठक में स्पष्ट किया कि इस बार मास्टर प्लान केवल नक्शों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नागरिकों की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और भविष्य की शहरी जरूरतों को केंद्र में रखकर तैयार किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता सचिव आवास डा. आर. राजेश कुमार ने की, जबकि प्राधिकरण उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी भी इसमें उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप तैयार किए जा रहे इस मास्टर प्लान में शहर की प्राकृतिक पहचान को बचाने को प्राथमिकता दी गई है। अधिकारियों ने साफ किया कि देहरादून की नदियां, जंगल, हरित क्षेत्र और खुले भूभाग विकास के दबाव में प्रभावित न हों, इसके लिए अलग संरक्षण ढांचा तैयार किया जाएगा।नदी किनारों की सुरक्षा, बड़े पैमाने पर पौधारोपण और ग्रीन जोन विस्तार को योजना में प्रमुख स्थान दिया गया है। बैठक में एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया, संयुक्त सचिव प्रत्यूष सिंह, गौरव चटवाल, चीफ टाउन प्लानर शशि मोहन श्रीवास्तव, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि नीरव मखवाना सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। देहरादून के भविष्य की रूपरेखा तय करने वाला यह दस्तावेज आने वाले वर्षों में शहर के विकास का आधार बनेगा।हर वार्ड में कैंप लगेंगे, लोग सीधे दर्ज कराएंगे आपत्तियांइस बार मास्टर प्लान को जनभागीदारी आधारित बनाने के लिए नगर निगम के प्रत्येक वार्ड में विशेष कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में नागरिक अपनी आपत्तियां और सुझाव सीधे दर्ज करा सकेंगे। अधिकारियों का मानना है कि स्थानीय स्तर से मिले सुझाव योजना को अधिक व्यवहारिक बनाएंगे और बाद में विवाद की स्थिति कम होगी। सचिव आवास ने निर्देश दिए कि आपत्तियों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो और प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाए।ट्रैफिक जाम से राहत के लिए नये कारिडोर और बाईपासशहर की सबसे बड़ी समस्या बन चुके ट्रैफिक दबाव को देखते हुए मास्टर प्लान में सड़क नेटवर्क विस्तार, सार्वजनिक परिवहन सुधार, पार्किंग व्यवस्था, नये बाईपास और वैकल्पिक कारिडोर शामिल किए जा रहे हैं। स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम पर भी काम होगा, ताकि बढ़ती आबादी के साथ यातायात व्यवस्था नियंत्रित रह सके। प्रस्तुतीकरण में शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों के लिए अलग समाधान प्रस्तावित किए गए।
नई समिति करेगी सुनवाई, उपाध्यक्ष को विशेष अधिकारमास्टर प्लान से जुड़ी आपत्तियों के त्वरित निस्तारण के लिए तीन सदस्यीय नई समिति बनाई गई है। इसमें उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी, सचिव मोहन सिंह बर्निया और संयुक्त सचिव प्रत्यूष कुमार को शामिल किया गया है। जटिल मामलों में उपाध्यक्ष को विशेष अधिकार दिए गए हैं, ताकि निर्णय प्रक्रिया तेज हो सके।
मसूरी के लिए अलग माडल, पर्यटन और पर्यावरण साथ-साथबैठक में मसूरी के लिए अलग विकास दृष्टि पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मसूरी को माडल हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया जाए, जहां पर्यटन विस्तार और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें।
निवेश और आवासीय योजनाओं को भी मिलेगी दिशानई आवासीय योजनाओं, तलपट मानचित्रों और निवेश-अनुकूल शहरी ढांचे को भी मास्टर प्लान का हिस्सा बनाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे शहर में योजनाबद्ध विस्तार संभव होगा और अनियंत्रित निर्माण पर नियंत्रण लगेगा।
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