पीआईबी के विशेष मीडिया टूर के तहत देहरादून के पत्रकारों ने विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता को समझा
विशाखापत्तनम: प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा आयोजित विशेष मीडिया आउटरीच कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तराखंड के देहरादून से आए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विशाखापत्तनम का दौरा किया। इस पहल का उद्देश्य भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा संरचना, रणनीतिक भूमिका और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन की दिशा में हो रही प्रगति से मीडिया को प्रत्यक्ष रूप से अवगत कराना था, ताकि जनसामान्य तक सटीक और तथ्यपरक जानकारी पहुंचाई जा सके।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS उदयगिरि पर आयोजित ऑनबोर्ड संवाद रहा। यह युद्धपोत प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित नई पीढ़ी का मल्टी-रोल स्टील्थ फ्रिगेट है। इसे अत्याधुनिक तकनीक, उन्नत स्टील्थ फीचर्स और कम रडार सिग्नेचर के साथ डिजाइन किया गया है, जिससे यह जटिल समुद्री परिस्थितियों में उच्च जीवित रहने की क्षमता रखते हुए दुश्मन की निगरानी से बचने में सक्षम है।
INS उदयगिरि उन्नत सर्विलांस एवं रडार सिस्टम, सतह से सतह और सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों, एंटी-सबमरीन युद्धक क्षमताओं तथा आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस है। इसमें नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर तकनीक और आधुनिक नेविगेशन प्रणाली का समावेश है, जिससे संयुक्त और बहु-आयामी अभियानों में अन्य नौसैनिक संसाधनों के साथ समन्वित कार्रवाई संभव हो पाती है।
जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन विकास सूद ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए पोत की परिचालन भूमिका और भारतीय नौसेना की मिशन तत्परता पर विस्तार से जानकारी दी।
तकनीकी ब्रीफिंग के दौरान रक्षा जनसंपर्क अधिकारी श्री सुजीत रेड्डी तथा लेफ्टिनेंट कमांडर प्रशांत कुमार ने नौसैनिक अभियानों की कार्यप्रणाली, अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों की संरचना और भारत के समुद्री हितों की सुरक्षा में नौसेना की रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
प्रिंसिपल वारफेयर ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर अमरीश यादव ने बताया कि INS उदयगिरि भारत की बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का सशक्त उदाहरण है और यह रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की अवधारणा को मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह युद्धपोत केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव अभियान तथा समुद्री सुरक्षा कार्यों के लिए भी पूरी तरह सक्षम है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाता है।
दौरे के दौरान पत्रकारों को युद्धपोत के प्रमुख परिचालन क्षेत्रों—जैसे ब्रिज, कॉम्बैट इंफॉर्मेशन सेंटर, डेक सिस्टम और चयनित तकनीकी कक्षों—का निरीक्षण कराया गया। नौसैनिक अधिकारियों ने उभरती समुद्री सुरक्षा चुनौतियों, हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक जिम्मेदारियों और आधुनिक नौसैनिक युद्ध में तकनीकी रूप से उन्नत एवं स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी।
मीडिया प्रतिनिधियों ने भारतीय नौसेना के उच्च पेशेवर मानकों, तकनीकी दक्षता और परिचालन क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे एक्सपोज़र कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों पर सटीक एवं जिम्मेदार रिपोर्टिंग को सशक्त बनाते हैं।
यह मीडिया आउटरीच कार्यक्रम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता, मजबूत समुद्री क्षमताओं और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को उजागर करता है, साथ ही क्षेत्रीय शांति और स्थिरता में भारत की भूमिका को भी रेखांकित करता है।
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