उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र से आस्था और परंपरा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली गुरुवार को अपने शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव पहुंच गई। भैयादूज के पावन अवसर पर गांव में मां गंगा की डोली का पारंपरिक और भव्य स्वागत किया गया।
बुधवार को मां गंगा की डोली गंगोत्री धाम से शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना हुई थी और मुखबा से तीन किलोमीटर पहले स्थित चंडेश्वरी मंदिर में रात्रि विश्राम किया था। आज सुबह समेश्वर देवता की अगुवाई में डोली मुखबा पहुंची, जहां ग्रामीणों ने फूल-मालाओं, धूप और जयकारों के साथ माता गंगा का मायके में पारंपरिक रूप से स्वागत किया।
मुखबा गांव को मां गंगा का मायका माना जाता है। अब आगामी छह महीनों तक मां गंगा की पूजा-अर्चना और दर्शन यहीं संपन्न होंगे। भक्तजन प्रतिदिन विशेष पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रमों के माध्यम से माता गंगा के निर्वाण दर्शन कर सकेंगे।
सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, कपाट खुलने के समय मां गंगा की उत्सव डोली मुखबा से गंगोत्री धाम तक पैदल जाती है और कपाट बंद होने के बाद धाम से वापस मुखबा लौटती है। यह यात्रा श्रद्धा, भक्ति और लोक परंपरा का प्रतीक मानी जाती है।
गांव में डोली के आगमन से पूरा क्षेत्र भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया। स्थानीय लोगों ने कहा कि भैयादूज के दिन मां गंगा का मुखबा में आगमन पूरे क्षेत्र के लिए शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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