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उत्तराखंड में अचानक ‘आग का गोला’ बन रहे चलते वाहन, आटो एक्सपर्ट से जानें इसका कारण – myuttarakhandnews.com

देहरादून: उत्तराखंड में इन दिनों चारधाम यात्रा अपने चरम पर है. दूसरी तरफ, पर्यटन सीजन के कारण भी सड़कों पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. राज्य के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर पहाड़ी मार्गों तक हर दिन हजारों बसें, टैक्सियां, निजी वाहन और मालवाहक गाड़ियां आवाजाही कर रही हैं. लेकिन इसी बढ़ते ट्रैफिक के बीच एक नया खतरा भी तेजी से सामने आ रहा है. पिछले कुछ सप्ताह के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में चलती गाड़ियों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आई हैं. कई मामलों में वाहन कुछ ही मिनटों में पूरी तरह जलकर खाक भी हो गए. हालांकि, अधिकांश घटनाओं में जान का बड़ा नुकसान नहीं हुआ. लेकिन इन घटनाओं ने वाहन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
लगातार सामने आ रहे आग लगने के मामले: उत्तराखंड में हाल के दिनों में बसों, टैक्सियों, पिकअप वाहनों और निजी कारों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं. हरिद्वार, देहरादून, विकासनगर और अन्य क्षेत्रों में चलती गाड़ियों में अचानक धुआं उठने और देखते ही देखते आग लगने की घटनाएं घटी हैं. कई घटनाओं में चालकों की सतर्कता और स्थानीय लोगों की मदद से यात्रियों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ी जनहानि टल गई. लेकिन यदि यही घटनाएं पहाड़ों के संकरे और संवेदनशील मार्गों पर होती हैं तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं.
उत्तराखंड की सड़कों पर वाहनों की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है. चारधाम यात्रा के दौरान तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है. कई वाहन लगातार लंबी दूरी तय करते हैं और उन्हें पर्याप्त आराम या तकनीकी निरीक्षण का समय नहीं मिल पाता. लगातार संचालन के कारण इंजन, ब्रेक सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. जब किसी वाहन की समय पर सर्विसिंग नहीं होती या उसमें पहले से कोई तकनीकी खराबी मौजूद होती है तो ऐसे हालात आग लगने जैसी घटनाओं को जन्म दे सकते हैं. हमने ऐसे मामले देखे हैं, जहां इन लापरवाही से गाड़ियों में आग लगने की घटना हुई है.-पारस मल्होत्रा, ऑटो एक्सपर्ट-
शॉर्ट सर्किट सबसे बड़ा कारण: ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट पारस के अनुसार, अधिकांश वाहन अग्निकांडों के पीछे इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खराबी प्रमुख कारण होती है. पुरानी या क्षतिग्रस्त वायरिंग बैटरी टर्मिनल की समस्या अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की अनियमित फिटिंग और तारों का आपस में टकराना शॉर्ट सर्किट का कारण बनता है. जैसे ही शॉर्ट सर्किट होता है चिंगारी पैदा होती है और यदि आसपास ज्वलनशील पदार्थ मौजूद हों तो कुछ ही सेकंड में आग पूरे वाहन में फैल सकती है. कई बार वाहन मालिक लागत बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर गैर-मानक वायरिंग या फिटिंग करवा लेते हैं, जो बाद में बड़े हादसे का कारण बनती है.
ईंधन रिसाव भी बढ़ रहा खतरा: वाहनों में आग लगने का दूसरा बड़ा कारण ईंधन प्रणाली में होने वाला रिसाव है. पेट्रोल और डीजल की पाइपलाइन में मामूली लीकेज भी गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. इंजन की गर्मी और ईंधन के संपर्क में आने से आग लगने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है. खासतौर पर पुराने वाहनों में पाइपों का घिस जाना क्लैंप ढीले पड़ना या ईंधन टैंक से संबंधित खराबियां आग का कारण बन सकती हैं. वाहन में यदि पेट्रोल या डीजल की गंध महसूस हो तो उसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. उत्तराखंड के हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश, नैनीताल और देहरादून में जिस तरह से जाम के हालात लगातार देखे जा रहे हैं, उससे खुद की गाड़ी तो गर्म होती है, साथ ही आसपास चलने वाले वाहन भी गर्मी ओर बढ़ा देते हैं. इसलिए सभी उपकरण बहतर होने जरूरी हैं.
पहाड़ी इलाकों की परिस्थितियां भी जिम्मेदार: उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां भी वाहन अग्निकांड की घटनाओं को प्रभावित करती हैं. लगातार चढ़ाई वाले मार्गों पर इंजन को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है. गर्मियों के मौसम में इंजन का तापमान तेजी से बढ़ता है. यदि कूलिंग सिस्टम सही ढंग से काम न कर रहा हो तो इंजन ओवरहीट हो सकता है. इसके अलावा लंबे समय तक ब्रेक का इस्तेमाल करने से ब्रेक सिस्टम भी अत्यधिक गर्म हो जाता है. कई बार यही गर्मी आसपास मौजूद ज्वलनशील पदार्थों को आग पकड़ने के लिए पर्याप्त साबित होती है.
कई मामलों में वाहनों की तकनीकी फिटनेस और नियमित मेंटेनेंस की अनदेखी सामने आती है. कुछ वाहन निर्धारित समय पर सर्विस नहीं कराए जाते जबकि कुछ में सुरक्षा मानकों के विपरीत संशोधन किए जाते हैं. लगातार उपयोग में रहने वाले व्यावसायिक वाहनों में समय-समय पर वायरिंग, इंजन, बैटरी, ब्रेक और ईंधन प्रणाली की जांच बेहद जरूरी होती है. लेकिन अक्सर यही सावधानी नहीं बरती जाती. जिसका परिणाम हादसों के रूप में सामने आता है.-निखिल शर्मा, परिवहन अधिकारी-
हाल ही में 6 और 7 जून को हरिद्वार में यात्री बसों के विरुद्ध विशेष सघन प्रवर्तन अभियान संचालित किया गया. जिसमें नेहा झा सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी ने लगभग इसी तरह की लापरवाही बरतने वाली 45 बसों के चालान किए हैं. जबकि 6 बसें सीज की गई हैं. 5 वाहनों के फिटनेस प्रमाण पत्र निरस्त कर दिए गए हैं.
आग लगने पर क्या करें? यदि चलते वाहन से धुआं निकलता दिखाई दे या जलने जैसी गंध महसूस हो तो चालक को तुरंत वाहन रोक देना चाहिए. सबसे पहले इंजन बंद करना चाहिए और सभी यात्रियों को सुरक्षित दूरी पर ले जाना चाहिए. यदि वाहन में अग्निशामक यंत्र मौजूद है और आग शुरुआती स्तर पर है तो उसे नियंत्रित करने का प्रयास किया जा सकता है. हालांकि आग तेजी से फैल रही हो तो किसी भी स्थिति में जोखिम नहीं लेना चाहिए और तत्काल दमकल विभाग और पुलिस को सूचना देनी चाहिए. ध्यान रखें की वाहन सुरक्षा केवल चालक या वाहन मालिक की जिम्मेदारी नहीं है. यात्रियों को भी सतर्क रहने की जरूरत है. यात्रा के दौरान यदि किसी प्रकार की जलने की गंध, धुआं या असामान्य आवाज सुनाई दे तो इसकी जानकारी तुरंत चालक को देनी चाहिए. बसों और टैक्सियों में सफर करते समय यह भी देखना चाहिए कि वाहन में अग्निशामक यंत्र मौजूद है या नहीं? छोटी सी सतर्कता बड़ी दुर्घटना को टाल सकती है.
हालिया घटनाओं ने बढ़ाई चिंता: हाल के दिनों में हरिद्वार-देहरादून हाईवे पर चलती बस में आग लगने की घटना ने लोगों को झकझोर दिया. इसके अलावा बहादराबाद क्षेत्र में राजस्थान जा रही बस में आग लगने का मामला भी चर्चा में रहा. विकासनगर क्षेत्र में एक पिकअप वाहन भी अचानक आग की चपेट में आ गया था. इन घटनाओं में यात्रियों और चालकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा. लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने परिवहन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है.

Nandni sharma

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