पिथौरागढ़: पड़ोसी देश नेपाल के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के कई गांवों में भारत के नहीं बल्कि नेपाल की संचार कंपनियों के सिग्नल आ रहे हैं. जिला मुख्यालय पिथौरागढ़ से केवल 18 से 20 किलोमीटर दूरी पर कुछ गांवों में जहां पर भारतीय मोबाइल सेवा नहीं चलती है, भारतीय मोबाइल कंपनियों के सिग्नल नहीं आने से उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं.
पिथौरागढ़ के गांवों में आता है नेपाली मोबाइल नेटवर्क: सीमांत पिथौरागढ़ जिले का ब्लाक मूनाकोट नेपाल सीमा से लगा हुआ है. वड्डा, बड़ालू सहित झूलाघाट के आसपास के गांवों से नेपाल का इलाका सामने नजर आता है. भारतीय क्षेत्र में जिन कंपनियों के टावर हैं उनकी रेंज कम होने से अधिकांश गांवों में कमजोर सिग्नल आते हैं. इसके उलट सामने नेपाल में लगे टावरों के सिग्नल साफ आते हैं. इसके चलते लोग न तो ठीक से बातचीत कर पाते हैं और न ही इंटरनेट का उपयोग कर पाते हैं.
भारतीय सिग्नल पर नेपाली नेटवर्क हावी: इंटरनेट नहीं आने से स्टूडेंट ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं कर पाते हैं. गैस बुकिंग भी नहीं हो पाती है. ग्रामीणों का कहना है कि वीडियो कॉलिंग आज भी उनके लिए सपना ही है. क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता अनिल चंद ने बताया कि-
जहां दुनिया आज डिजिटल दौर में है, ऐसा लगता है कि हम आदि युग में चल रहे हैं. गांव, जिला मुख्यालय से केवल 18 किलोमीटर की ही दूरी पर है. बड़ी आबादी है. मटकोड़ा, बसेड़ा, सिरकुच, जाखपंत, मजिरकांडा, च्यौड़ी, जरकानी, ढोलाखोल, कटियानी के लोगों को मोबाइल सिग्नल नहीं होने से सबसे अधिक समस्या होती है. जीआईसी मायालेख में टावर लगाने पर इन गांवों की संचार सेवा में सुधार हो सकता है.-अनिल चंद, सामाजिक कार्यकर्ता-
मोबाइल टावर की मांग को लेकर 1046 बार ज्ञापन दिया जा चुका है. विधायक और सांसद को भी कई बार मांग पत्र सौंपा जा चुका है. कोई सुनवाई नहीं हुई है. एक बार फिर डीएम के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया है.-अनिल चंद, सामाजिक कार्यकर्ता-
पिथौरागढ़ की हजारों की जनसंख्या संचार सुविधा से वंचित: जिले के नेपाल से लगे कनालीछीना और धारचूला विकासखंडों की हजारों की आबादी आज भी बेहतर संचार सुविधा से वंचित है. धारचूला से पंचेश्वर तक 100 किलोमीटर के क्षेत्र में में आज भी कई गांव हैं, जहां भारतीय मोबाइल कंपनियों के बजाय नेपाल की संचार कंपनियों के सिग्नल आते हैं. ज्यादातर हिस्सों में बीएसएनएल सहित निजी कंपनियां अब टावर लगा चुकी हैं. फिर भी लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है. अब देखना होगा कि 5जी के इस युग में इस क्षेत्र के लोग कब भारतीय नेटवर्क का प्रयोग कर पाते हैं.
बीएसएनएल को इस संबंध में निर्देशित किया गया है. जिले के जिन इलाकों में संचार सेवा नहीं है, वहां पर जल्दी बीएसएनएल ने टावर लगाने की बात कही है. जहां भी टावर लगे हैं, संचार कंपनियों को उनके संचालन के निर्देश दिए गए हैं. नेपाल सीमा से लगे गांवों में बीएसएनएल के साथ ही जियो से भी बात चल रही है. जल्दी इन इलाकों में संचार सेवा सुचारू होगी.
-आशीष भटगांई, डीएम पिथौरागढ़-
नेपाली मोबाइल सिग्नल से क्या खतरा हो सकता है? आम तौर पर हर देश अपनी सीमा पर जैमर लगाकर दूसरे देश के मोबाइल सिग्नल को जाम कर देता है. विदेशी मोबाइल सिग्नल सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा जोखिम होता है. इससे गोपनीयता के उल्लंघन का खतरा रहता है. क्योंकि इससे पड़ोसी देश दूसरे देश के महत्वपूर्ण लोगों की लोकेशन और एक्टिविटी पर नजर रख सकता है. अगर आपका फोन अपने देश की बजाय दूसरे देश के मोबाइल नेटवर्क से जुड़ जाता है तो डिवाइस की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है. अपराधियों और आतंकवादियों को देश विरोधी कृत्य करने में विदेशी मोबाइल नेटवर्क सहायक हो सकता है.
By Nikhil Pant NAINITAL, 16 May: The 136th annual Athletic Meet of St Joseph’s College was organised with great enthusiasm, colour…
my uttarakhand news Bureau DEHRADUN, 16 May: The State Information Department observed ‘No Vehicle Day’…
गोपेश्वर – भगवान शिव के जयघोष और भक्तों की श्रद्धा के बीच चतुर्थ केदार भगवान…
श्रीदेव सुमन नगर मंडल के नवनियुक्त पदाधिकारियों से मिले मंत्री गणेश जोशी देहरादून। कैबिनेट मंत्री…
The scorching sun is troubling people in both the plains and mountainous regions of Uttarakhand.…
देहरादून। उत्तराखण्ड सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने रविवार देर रात्रि अनारवाला मालसी मोटर…