देहरादून। ग्राफिक एरा अस्पताल की कार्डियोलॉजी टीम ने जटिल हृदय रोगों के आधुनिक उपचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विशेषज्ञों ने 60 वर्षीय मरीज के हृदय के लेफ्ट एट्रियल एपेंडेज (एलएए) को बिना ओपन सर्जरी के सफलतापूर्वक बंद किया। यह प्रक्रिया ऐसे मरीजों के लिए उपचार की नई उम्मीद मानी जा रही है, जिनमें एट्रियल फिब्रिलेशन के कारण स्ट्रोक का खतरा बना रहता है।मरीज को लंबे समय से क्रॉनिक एट्रियल फिब्रिलेशन की समस्या थी और वह पहले दो बार स्ट्रोक का सामना कर चुका था। स्ट्रोक के बाद पैरालिसिस से रिकवरी होने के बावजूद दोबारा स्ट्रोक का खतरा बना हुआ था। मरीज पहले से एनओएसी (नॉन-विटामिन के ओरल एंटीकोएगुलेंट) थेरेपी पर था, लेकिन इसके बावजूद उसे बार-बार स्ट्रोक हुए।जांच में एलएए का आकार करीब 28 से 30 मिलीमीटर पाया गया। इसके आधार पर 33 मिलीमीटर के एलएए ऑक्लूडर डिवाइस का चयन किया गया। 3-डी इकोकार्डियोग्राफी की मदद से डिवाइस को हृदय में निर्धारित स्थान पर सटीकता के साथ स्थापित किया गया। कार्डियक सीटी जांच में एलएए के भीतर पुराना रक्त का थक्का भी मिला था, जिससे प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण हो गई थी।
इस जटिल प्रक्रिया को ग्राफिक एरा अस्पताल के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. राज प्रताप सिंह, डॉ. हिमांशु राणा, डॉ. संदीप मालवीय और डॉ. आशीष सिंह ने कार्डियक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. एस.पी. गौतम और डॉ. पराग के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया।अस्पताल के अनुसार, प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वह 24 घंटे के भीतर चलने-फिरने लगा। मरीज तेजी से रिकवरी कर रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि एलएए को बंद करने की यह प्रक्रिया चयनित मरीजों में हृदय के इस हिस्से में रक्त के थक्के बनने और उससे होने वाले स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।ग्राफिक एरा अस्पताल की यह उपलब्धि उत्तराखंड में जटिल हृदय रोगों के आधुनिक और कम आक्रामक उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। विशेष रूप से ऐसे मरीज, जिन्हें बार-बार स्ट्रोक हो चुका हो अथवा जिनके लिए लंबे समय तक एंटीकोएगुलेंट दवाओं का सेवन चुनौतीपूर्ण हो, उनके लिए यह उपचार विकल्प नई उम्मीद प्रदान करता है।
