उत्तराखंड भाजपा में गुटबाजी का नया मोड़: अरविंद पांडे के समर्थन में दिग्गजों का दौरा, लेकिन अवैध भूमि कब्जे के आरोपों पर नैतिक सवाल – पर्वतजन

देहरादून/गदरपुर, 21 जनवरी 2026: उत्तराखंड में सत्तारूढ़ भाजपा के अंदर गुटबाजी और असंतोष की लहरें अब नैतिक और कानूनी सवालों के साथ और तेज हो गई हैं। गदरपुर विधायक अरविंद पांडे, जो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखा रहे हैं, पर प्रशासन की कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
 
लेकिन पार्टी के दिग्गज नेता उनके समर्थन में खड़े होकर सियासी चक्रव्यूह रच रहे हैं। यह सब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रदेश दौरे के दौरान हो रहा है, जो भाजपा हाईकमान के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पांडे पर लगे गंभीर आरोपों—जिनमें एक महिला की जमीन कब्जाने के आरोप और सरकारी भूमि पर हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अतिक्रमण—को लेकर इन दिग्गजों का समर्थन कैसे जायज ठहराया जा सकता है? क्या यह पार्टी की ‘अतिक्रमण मुक्त उत्तराखंड’ नीति और कानून के शासन की अवहेलना नहीं है?

 
 
अरविंद पांडे, जो पिछले कुछ वर्षों से पार्टी में सीमित भूमिका में थे, हाल ही में सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण और अन्य विवादों को लेकर मुख्यमंत्री पर आरोप लगाए हैं। जवाब में, ऊधम सिंह नगर जिला प्रशासन ने उनके गूलरभोज स्थित कैंप ऑफिस पर अतिक्रमण हटाने का नोटिस चस्पा किया है, जिसमें 15 दिनों के भीतर कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में की गई है, जो सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण को हटाने का आदेश दे चुका है।
लेकिन पांडे इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहे हैं और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर न्याय की मांग कर चुके हैं।
इससे भी गंभीर आरोप एक किसान परिवार से जुड़े हैं, जहां एक महिला (किसान की मां) और उनके बेटे ने पांडे पर अपनी जमीन कब्जाने, धमकी देने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार ने कहा है कि वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं और अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आत्महत्या कर लेंगे।
 
एक अन्य भाजपा नेता ने भी पांडे पर जमीन कब्जाने के आरोप लगाए हैं, जिससे उनके खिलाफ सियासी बवाल बढ़ गया है।
 
ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब पांडे परिवार पर लैंड फ्रॉड के भी दावे किए जा रहे हैं, और पीड़ितों ने अपनी जान को खतरा बताया है।
 
इन सबके बीच, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का 22 जनवरी को पांडे के गदरपुर आवास पर पहुंचने का कार्यक्रम तय है। इसे मकर संक्रांति के अवसर पर ‘घी-खिचड़ी भोज’ का नाम दिया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे गुटबाजी का खुला प्रदर्शन माना जा रहा है। ठाकुर-ब्राह्मण की यह जोड़ी पांडे को ‘संकटमोचक’ के रूप में पेश कर रही है, जो धामी सरकार के लिए सीधी चुनौती है। मदन कौशिक, जो खुद ‘वनवास’ काट चुके हैं, और त्रिवेंद्र रावत, जिन्हें 2021 में मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था, का यह एकजुट होना पुरानी रंजिशों को हवा दे रहा है।
लेकिन सवाल यहां उठता है: क्या इन दिग्गजों का पांडे का समर्थन उनके कथित अवैध कार्यों को जस्टिफाई करता है? एक तरफ भाजपा सरकार ‘लैंड जिहाद’ और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है, वहीं पार्टी के ही नेता ऐसे व्यक्ति का साथ दे रहे हैं जिस पर हाईकोर्ट का आदेश लंबित है और एक महिला समेत किसान परिवार की जमीन कब्जाने के गंभीर आरोप हैं। क्या यह पार्टी की छवि को धूमिल नहीं कर रहा? राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह कदम न केवल धामी के फैसलों को कमजोर कर रहा है, बल्कि नैतिक आधार पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि पांडे पर कार्रवाई हुई तो विद्रोह हो सकता है, लेकिन न करने पर सरकार की विश्वसनीयता दांव पर लगेगी।
यह घटनाक्रम अमित शाह के 21-22 जनवरी के दौरे से जुड़कर और संवेदनशील हो गया है। शाह ऋषिकेश और हरिद्वार में कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं, जहां वे कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। ऐसे में दिग्गजों का पांडे के घर जाना हाईकमान को संदेश दे रहा है कि प्रदेश इकाई में दरारें गहरी हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली से इन घटनाक्रमों पर नजर रखी जा रही है, लेकिन अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अनीता जोशी कहती हैं, “यह भाजपा की आंतरिक कलह का नया आयाम है। पांडे के अवैध कब्जे के आरोपों को नजरअंदाज कर समर्थन देना पार्टी के ‘कानून का राज’ के दावे पर सवाल उठाता है। अमित शाह के दौरे के दौरान यह ड्रामा हाईकमान को मजबूर करेगा कि वे हस्तक्षेप करें, वरना 2027 चुनाव से पहले संगठन बिखर सकता है।”
कल गदरपुर में होने वाली मुलाकात के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्या यह ‘खिचड़ी’ भाजपा के लिए नई सियासी उथल-पुथल लाएगी, या हाईकमान इन सवालों का जवाब देगा? फिलहाल, उत्तराखंड भाजपा में यह गुटबाजी सरकार और पार्टी दोनों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है।

Sapna Rani

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