उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों का जेब से पैसे निकालने का नया तरीका, मेंटिनेंस-एनुअल चार्ज का भी पेरेंट्स पर बोझ – Uttarakhand

Private schools in Uttarakhand have a new way of extracting money from their pockets, maintenance and annual charges are also a burden on parents

Private schools in Uttarakhand have a new way of extracting money from their pockets, maintenance and annual charges are also a burden on parentsPrivate schools in Uttarakhand have a new way of extracting money from their pockets, maintenance and annual charges are also a burden on parentsPrivate schools in Uttarakhand have a new way of extracting money from their pockets, maintenance and annual charges are also a burden on parentsइस खबर को शेयर करेंLatest posts by Sapna Rani (see all)देहरादून: उत्तराखंड में प्राइवेट स्कूलों में केवल फीस और महंगी किताबों के नाम पर ही लूट नहीं हो रही बल्कि छात्रों को फिल्म दिखाने, एडमिशन फीस, मैंटिनेंस के नाम पर अभिभावकों की जेब पर डाका डाला रहा है। शिक्षा विभाग के टोल फ्री नंबर पर अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की मनमानी की पोल खोल रहे हैं।प्राइवेट स्कूलों की मनमानी के खिलाफ शिक्षा विभाग के टोल फ्री नंबर पर शिकायतों का संख्या 100 के पार हो गई।माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि अब तक टोल फ्री नंबर पर 102 शिकायतें दर्ज हो चुकी है। इन शिकायतों पर कार्रवाई के लिए सीईओ का ब्योरा भेजा जा रहा है। सभी सीईओ ने शिकायतों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी जा रही है।देहरादून के एक अभिभावक ने टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई है कि उनका बेटा इंद्रानगर स्थित एक स्कूल में कक्षा छह में पढ़ता है। स्कूल प्रबंधन फिल्म दिखाने के नाम पर प्रत्येक छात्र से 400-400 रुपये वसूल रहा है। हर बच्च को यह देना ही है। इस पर रोक लगनी चाहिए।मेंटिनेंस के नाम पर हर छात्र से 2000 रुपये की वसूलीपौड़ी के एक अभिभावक ने शिकायत की है कि उनकी बेटी कोटद्वार के एक स्कूल में पढ़ती हैं। इस स्कूल में एनुअल चार्ज के साथ साथ दो-दो हजार रुपये स्कूल की मेंटिनेंस के नाम पर भी वसूले जा रहे हैं। प्रबंधन के दबाव के कारण हर अभिभावकों को यह दोनों फीस चुकानी पड़ती है।हर साल बढ़ाई जा रही 10 फीसदी फीसकांडा-बागेश्वर के अभिभावक ने टोल फ्री नंबर पर बताया कि उनके बच्चों के स्कूल में हर साल दस-दस फीसदी फीस बढ़ाई जा रही है। किताबों को मूल्य भी काफी ज्यादा है। एक ही दुकान से किताब खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है।एनुअल चार्ज, वार्षिक दिवस की भी वसूलीदून के प्रेमनगर निवासी एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनके बेटे के स्कूल में सामान्य फीस तो बढ़ाई ही जा रही है। साथ में हर साल वार्षिक शुल्क, स्कूल का स्थापना दिवस, खेल दिवस के नाम भी पर अभिभावकों से खूब पैसा वसूला जा रहा है।

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