देहरादून। भारत के द्वितीय राष्ट्रपति, महान शिक्षाविद्, दार्शनिक एवं भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए देश-प्रदेश के सभी गुरुजनों, शिक्षकों एवं शिक्षा जगत से जुड़े लोगों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर शिक्षकों के सम्मान, रोजगार सुरक्षा, टीईटी की अनिवार्यता तथा पुरानी पेंशन बहाली जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया।वक्तव्य में कहा गया कि शिक्षक केवल कक्षा में ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है। बच्चों और युवाओं को शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, विवेक एवं जिम्मेदारी का बोध कराकर उन्हें योग्य नागरिक बनाने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब उसकी शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो और शिक्षक सम्मानित, सुरक्षित एवं आत्मविश्वास से परिपूर्ण हों।शिक्षकों की मौजूदा समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि वर्षों से पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ सेवाएं दे रहे शिक्षकों के सामने दोबारा टीईटी जैसी परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता का प्रश्न गंभीर है। जिन शिक्षकों ने 15, 20, 25 और 30 वर्षों तक विद्यार्थियों को पढ़ाया और कई पीढ़ियों का भविष्य संवारा, उन्हें लंबे सेवाकाल के बाद पुनः अपनी योग्यता साबित करने के लिए बाध्य करना विचारणीय विषय है।कहा गया कि शिक्षक तभी पूरी एकाग्रता और मनोयोग से विद्यार्थियों का भविष्य संवार सकता है, जब उसे अपने रोजगार, सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को लेकर भरोसा हो। शिक्षक यदि स्वयं मानसिक तनाव, असुरक्षा और अनिश्चितता में रहेगा तो उसका प्रतिकूल प्रभाव पूरी शिक्षा व्यवस्था पर पड़ना स्वाभाविक है।वक्तव्य में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को भी शिक्षकों और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय बताया गया। कहा गया कि लंबे समय से पुरानी पेंशन बहाली के आंदोलन का समर्थन किया जाता रहा है और आगे भी शिक्षकों एवं कर्मचारियों के इस न्यायपूर्ण संघर्ष में मजबूती से साथ खड़ा रहा जाएगा। वर्षों तक सरकार और समाज की सेवा करने वाले कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन मिलना उनका अधिकार है।उन्होंने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई केवल किसी एक वर्ग की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उन लोगों के सम्मान और भविष्य से जुड़ा विषय है, जिनके कंधों पर आने वाली पीढ़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी है। सरकारों को शिक्षकों की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए ऐसे निर्णय लेने चाहिए, जिससे उनका मनोबल बढ़े, न कि उनमें भय और असुरक्षा की भावना पैदा हो।शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के सम्मान, अधिकार, रोजगार की सुरक्षा, पुरानी पेंशन बहाली और उनके हितों से जुड़े न्यायपूर्ण संघर्षों में साथ खड़े रहने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया।कहा गया कि शिक्षक सुरक्षित होगा, तभी शिक्षा मजबूत होगी और शिक्षा मजबूत होगी, तभी राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित एवं उज्ज्वल होगा।
