देहरादून। शहर में स्थित राष्ट्रपति निकेतन (राष्ट्रपति आशियाना) के गेट नंबर 4 के सामने खोले गए शराब के ठेके को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। स्थानीय महिलाओं के 11 दिनों तक चले शांतिपूर्ण आंदोलन के बाद प्रशासन ने उक्त दुकान को वहां से हटाकर दूसरी जगह स्थानांतरित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
संवेदनशील और प्रतिष्ठित क्षेत्र में शराब की दुकान खोले जाने से स्थानीय लोगों, विशेषकर महिलाओं में भारी आक्रोश था। उनका कहना था कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से जुड़े इस स्थल के समीप इस प्रकार का व्यवसाय न केवल क्षेत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक और सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
महिलाओं ने लगातार ठेके के बाहर धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन से इसे तत्काल हटाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दुकान खुलने से असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ सकता है, जिससे महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा प्रभावित होगी।
इस क्षेत्र में स्कूल, मंदिर, गुरुद्वारा और एक ब्लाइंड स्कूल भी स्थित है, जहां विशेष जरूरतों वाले बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस पहलू को भी आंदोलनकारियों ने प्रमुखता से उठाया।
महिलाओं ने दावा किया था कि उन्होंने इस मुद्दे को राष्ट्रपति कार्यालय तक पहुंचाया है और चेतावनी दी थी कि यदि स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस बीच आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल द्वारा मामले को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया था। इसके बाद प्रशासन ने स्थलीय निरीक्षण कराया।
एसडीएम सदर कुमकुम जोशी के अनुसार, निरीक्षण रिपोर्ट में जन सुरक्षा, सामाजिक प्रभाव और राष्ट्रपति निकेतन की गरिमा जैसे तीन प्रमुख बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए दुकान को वहां से हटाने का निर्णय लिया गया। अब शराब की दुकान को अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।
प्रशासन के इस फैसले के बाद आंदोलनरत महिलाओं में संतोष का माहौल है और इसे उनकी एकजुटता तथा शांतिपूर्ण संघर्ष की महत्वपूर्ण जीत माना जा रहा है।
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