निवासियों ने कहा—ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ स्वीकार नहीं, दस्तावेजों में बदलाव और आर्थिक बोझ बढ़ने की जताई चिंता
देहरादून। क्लेमेंटटाउन क्षेत्र का नाम बदलने के प्रस्ताव को लेकर स्थानीय लोगों में व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है। क्षेत्र के निवासियों ने इस पहल का खुलकर विरोध करते हुए इसे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक विरासत के साथ छेड़छाड़ बताया है। उनका कहना है कि क्लेमेंटटाउन केवल एक नाम नहीं, बल्कि दशकों से यहां रह रहे लोगों की भावनाओं, यादों और पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है।
स्थानीय नागरिकों अभिषेक परमार, विनोद राई ,वांके माहेश्वरी और दलीप मेहता ने कहा कि क्लेमेंटटाउन का इतिहास 20वीं सदी से जुड़ा हुआ है और यह क्षेत्र अपनी विशिष्ट पहचान के लिए जाना जाता है। ऐसे में नाम परिवर्तन का निर्णय बिना जनसहमति के लिया जाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने से न केवल क्षेत्र की पहचान धूमिल होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी।
निवासियों ने यह भी चिंता जताई कि नाम परिवर्तन के बाद आम लोगों को अपने सभी जरूरी दस्तावेजों में संशोधन कराना पड़ेगा। इसमें आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, बैंक दस्तावेज, संपत्ति के कागजात और शैक्षणिक प्रमाण पत्र तक शामिल हैं। यह प्रक्रिया न केवल जटिल और समय लेने वाली है, बल्कि इसके लिए लोगों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी लगाने पड़ेंगे।
इसके अलावा, नाम परिवर्तन का असर सरकारी और निजी संस्थानों पर भी पड़ेगा। स्कूल, कॉलेज, बैंक, डाकघर, व्यापारिक प्रतिष्ठान और अन्य संस्थानों को अपने साइन बोर्ड, लेटरहेड, रजिस्ट्रेशन दस्तावेज और नेम प्लेट्स बदलने पड़ेंगे, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए यह खर्च और अधिक कठिनाई पैदा कर सकता है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि इस तरह के निर्णय लेने से पहले जनसुनवाई और व्यापक विचार-विमर्श होना चाहिए था। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर पुनर्विचार किया जाए और स्थानीय जनता की भावनाओं का सम्मान किया जाए।
इस दौरान सुनील सिंह रावत, दीपक गोसाई, अनिल सोलंकी, विनोद वर्मा, प्रदीप राई, गोविंद थापा, राजू पसोला, राजेश भट्ट, मंजु फर्तियाल, दिव्या सभरवाल, शीतल और पुष्पा रावत सहित कई स्थानीय नागरिक मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में नाम परिवर्तन के प्रस्ताव का विरोध किया।
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