देहरादून: देशभर में एसआईआर यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच अब उत्तराखंड में भी इसकी गंभीरता साफ दिखाई देने लगी है. सिर्फ निर्वाचन आयोग ही नहीं, बल्कि प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दल भी SIR को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं. यही वजह है कि राजनीतिक दलों ने इससे जुड़े नामित सदस्यों का बूथ स्तर तक विस्तृत लेखा-जोखा तैयार करना शुरू कर दिया है.
उत्तराखंड में SIR को लेकर सियासी सक्रियता: चुनावों के दौरान वोटर लिस्ट में पारदर्शिता हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है. इन हालातों में राजनीतिक दल भी वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ जैसे आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे हैं. इस बीच स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की प्रक्रिया पर चर्चा राजनीतिक दलों के लिए नया मुद्दा बन गई है. उत्तराखंड में भी फिलहाल राजनीतिक दल चर्चा से आगे बढ़कर इस दिशा में धरातल पर काम करते हुए दिखाई दे रहे हैं.
SIR को लेकर बूथ तक सरगर्मीराजनीतिक दलों ने होमवर्क किया तेज: SIR के महत्व को समझते हुए दलों ने इस जिम्मेदारी के लिए होमवर्क तेज कर दिया है. पार्टी नेतृत्व का फोकस साफ है, ऐसे काबिल और भरोसेमंद कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेदारी दी जाए, जो न केवल चुनावी प्रक्रियाओं को समझते हों, बल्कि SIR जैसे तकनीकी और संवेदनशील मुद्दे पर भी पकड़ रखते हों.
युद्ध स्तर पर चल रहा है राजनीतिक दलों का काम: दावा है कि राज्य निर्वाचन आयोग को दिसंबर महीने के अंत तक उत्तराखंड की दोनों प्रमुख राजनीतिक पार्टियां बूथ स्तर के सदस्यों की सूची सौंप देंगी. फिलहाल इस दिशा में युद्धस्तर पर काम चल रहा है. पार्टी संगठन ऐसे कार्यकर्ताओं को चिन्हित कर रहा है, जो इस प्रक्रिया को बारीकी से समझ सकें.
दिसंबर के अंत तक हो जाएंगे बीएलए नामांकन: इससे पहले विधानसभा सीट स्तर पर नामित होने वाले BLA-1 को लेकर भी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने 70 BLA-1 सदस्यों की सूची राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप चुके हैं. हालांकि निर्वाचन आयोग की ओर से BLA (Booth Level Agents) नामांकन को लेकर लगातार डेडलाइन दी जाती रही है, लेकिन अब माना जा रहा है कि दिसंबर के अंत तक सभी जरूरी सूचियां आयोग को सौंप दी जाएंगी.
SIR को लेकर ये है कांग्रेस की तैयारी: विपक्षी दल कांग्रेस की बात करें तो उसने न सिर्फ 70 BLA-1 चिन्हित कर लिए हैं, बल्कि बूथ स्तर पर करीब 11,700 पार्टी कार्यकर्ताओं की सूची भी लगभग तैयार कर ली है. कांग्रेस ने इसके लिए प्रभारी भी नियुक्त किए हैं जोकि BLA 1 के साथ मिलकर BLA 2 की सूची तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
बीजेपी भी नहीं है पीछे: भारतीय जनता पार्टी भी इस रेस में पीछे नहीं है. प्रदेश भर में संगठनात्मक मंथन के बाद दूसरी सूची को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुकी है. खास बात यह है कि SIR को लेकर देशभर में जहां राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, वहीं उत्तराखंड में दल जमीनी तैयारी पर जोर दे रहे हैं. विपक्ष भले ही निर्वाचन आयोग को लेकर सवाल खड़े कर रहा हो, लेकिन चुनावी दृष्टि से SIR की अहमियत को समझते हुए सभी दल अपने-अपने कार्यकर्ताओं को BLA के रूप में तैनात करने में जुटे हैं.
बीएलए के लिए प्रक्रिया समझना जरूरी: पार्टियों की कोशिश है कि ऐसे कार्यकर्ताओं को चुना जाए, जो इस प्रक्रिया को गहराई से समझते हों. साथ ही नामित किए जाने वाले BLA को पार्टी स्तर पर प्रशिक्षण और जरूरी जानकारी भी दी जाएगी, ताकि वे अपनी जिम्मेदारी को प्रभावी और सटीक ढंग से निभा सकें.
बीजेपी को डेडलाइन से पहले सूची तैयार होने की उम्मीद: भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार कहते हैं कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा की गई बैठक में वह खुद मौजूद थे. उन्हें पूरी उम्मीद है कि आयोग ने दिसंबर की जो डेडलाइन तय की है, उससे पहले ही BLA 2 की सूची तैयार करके आयोग को दे दी जाएगी.
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