उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की योजना पर चर्चा हो रही है। गंगोत्री मंदिर प्रबंधन समिति के प्रमुख सुरेश सेमवाल ने सामाजिक मीडिया पर एक वीडियो के माध्यम से इसकी सूचना साझा की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शीतकालीन निवास स्थल मुखबा गांव में भी यह प्रतिबंध प्रभावी होगा।
इस फैसले का ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने इसे समाज को विभाजित करने वाला और सांप्रदायिक सौहार्द के लिए नुकसानदेह करार दिया। मौलाना का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाइयां हिंदू-मुस्लिम एकता को प्रभावित करती हैं और राष्ट्र की अखंडता को क्षति पहुंचाती हैं। उन्होंने आगे कहा कि कुछ संकीर्ण विचारधारा वाले व्यक्ति भारत में अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर रहे हैं। जब भी कोई हिंदू उत्सव या आयोजन आरंभ होता है, तो पहले से ही एक बोर्ड लगा दिया जाता है जिसमें मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को अनुमति नहीं होने की बात लिखी होती है। हाल ही में गंगोत्री धाम की समिति ने मुस्लिमों को प्रवेश न देने की घोषणा की है।
अब केदारनाथ और बदरीनाथ में भी इसी तरह के उपाय अपनाने की तैयारी की जा रही है। मौलाना के अनुसार, ऐसी गतिविधियां और भावनाएं कट्टरपंथी धारणाओं को प्रोत्साहन देती हैं तथा उन तत्वों को मजबूत बनाती हैं जो राष्ट्र को कमजोर करने, हिंदू-मुस्लिम सद्भाव को नष्ट करने और समाज में दरार डालने की मंशा रखते हैं। ये तत्व समाज के विरोधी हैं।
एक ओर जहां ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने गंगोत्री मंदिर प्रबंधन के इस निर्णय का विरोध किया है, वहीं ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने इसे उचित ठहराया है।
डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा कि यह धार्मिक विषय है और धर्म की अपनी गरिमा है। यदि मंदिर प्रबंधन समिति यह निर्धारित करती है कि गैर-हिंदू धाम में प्रवेश नहीं कर सकते, तो किसी को इससे असहमति नहीं जतानी चाहिए। प्रत्येक स्थान के अपने नियम होते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों को संभवतः गंगोत्री नहीं जाना चाहिए, और यदि वे जाते हैं तो विवाद उत्पन्न हो सकता है। अन्य धर्मों के पवित्र स्थलों में प्रवेश से परहेज करना उत्तम है। मक्का और मदीना में गैर-मुस्लिमों को अनुमति नहीं है, लेकिन इस पर कोई विवाद नहीं उठाता। ऐसे मुद्दों में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।
-डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी, मुख्य इमाम, ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन-
उल्लेखनीय है कि गंगोत्री मंदिर समिति के अतिरिक्त, श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) भी दोनों धामों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की संभावना तलाश रही है। इस संबंध में बीकेटीसी के प्रमुख हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आगामी बोर्ड बैठक में वे श्री केदारनाथ और श्री बदरीनाथ धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का सुझाव पेश करेंगे।
श्री केदारनाथ धाम और श्री बदरीनाथ धाम पर्यटन स्थल नहीं हैं। वे सनातन परंपराओं के शीर्ष आध्यात्मिक केंद्र हैं। यहां प्रवेश का मुद्दा नागरिक अधिकारों से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह धार्मिक विश्वास का प्रश्न है।
-हेमंत द्विवेदी, प्रमुख, बीकेटीसी-
श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के प्रमुख हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया है कि सनातन धर्म में विश्वास न रखने वाले किसी भी व्यक्ति के बदरीनाथ-केदारनाथ धाम में पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव लाया जाएगा।
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