

मेरठ से लाई गई थी शराब की खेप, डिफेंस और चंडीगढ़ के नाम वाले लेबल मिले; एक आरोपी गिरफ्तार, आबकारी विभाग ने शुरू की जांच।
ऋषिकेश/देहरादून: उत्तराखंड में अवैध शराब के कारोबार पर आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। ऋषिकेश के गढ़ी श्यामपुर के पास संयुक्त टीम ने दिल्ली नंबर की हुंडई क्रेटा कार से शराब की 10 पेटियां बरामद की हैं। बोतलों पर लगे लेबल और होलोग्राम प्रथम दृष्टया फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है। मामले में मेरठ निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
CSD के नाम पर शराब बेचने की तैयारी!
आबकारी विभाग को मुखबिर से गढ़ी श्यामपुर क्षेत्र में अवैध शराब के परिवहन की सूचना मिली थी। इसके बाद आबकारी निरीक्षक ऋषिकेश प्रेरणा बिष्ट के नेतृत्व में ऋषिकेश की टीम और जनपदीय प्रवर्तन दल देहरादून ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए हुंडई क्रेटा कार संख्या DL 4CAZ 9073 को रोककर तलाशी ली।
तलाशी के दौरान कार से रॉयल स्टैग व्हिस्की की 100 बोतल और बडवाइजर बीयर की 24 बोतल बरामद हुईं।
बोतलों पर डिफेंस और चंडीगढ़ के लेबल
बरामद शराब की बोतलों पर चौंकाने वाले लेबल मिले। व्हिस्की की बोतलों पर ‘For Sale Defence Personnel Only’, जबकि बीयर की बोतलों पर ‘For Sale in Chandigarh Only’ लिखा था।
आबकारी विभाग की प्रारंभिक जांच में लेबल और होलोग्राम प्रथम दृष्टया नकली पाए गए हैं। हालांकि, इनकी वास्तविकता की अंतिम पुष्टि के लिए जांच जारी है।
मेरठ से लाई गई थी शराब की खेप
कार चालक की पहचान निशांत शर्मा पुत्र राकेश शर्मा, निवासी मोदीपुरम, मेरठ (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने शराब मेरठ से लाने की बात बताई। विभाग के अनुसार, शराब को कैंटीन की शराब बताकर आम लोगों को बेचने की तैयारी थी।
हालांकि, शराब की आपूर्ति कहां से हुई, नकली लेबल और होलोग्राम किसने तैयार किए तथा इस कारोबार में अन्य लोग शामिल हैं या नहीं, इसका खुलासा विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगा।
आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई
आबकारी विभाग ने आरोपी के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 63/72 के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग के अनुसार, आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
संयुक्त कार्रवाई में आबकारी निरीक्षक प्रेरणा बिष्ट के साथ जनपदीय प्रवर्तन दल देहरादून के आबकारी निरीक्षक जयवीर सिंह, उप आबकारी निरीक्षक आशीष प्रकाश उनियाल और अर्जुन सिंह सहित विभागीय कर्मचारी शामिल रहे।
अब जांच के सामने अहम सवाल है—क्या यह केवल एक खेप का मामला है या नकली होलोग्राम और लेबल के जरिए शराब बेचने वाला कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
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