देहरादून: उत्तराखंड में जनता की गाढ़ी कमाई लूटने वाले धोखेबाजों पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी है. सरकार ने एलयूसीसी (LUCC) के घोटालेबाजों की कई राज्यों में मौजूद संपत्तियों को कुर्क करने का भी फैसला ले लिया है. खास बात ये है कि सीबीआई (CBI) की एंट्री के बाद उत्तराखंड शासन ने भी इस मामले में गंभीरता के साथ कदम आगे बढ़ा दिए हैं.
उत्तराखंड में हजारों लोगों की गाढ़ी कमाई से जुड़े बहुचर्चित LUCC (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी) घोटाले में अब बड़ा एक्शन शुरू हो गया है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर उत्तराखंड सरकार ने आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. खास बात ये है कि CBI की ओर से की गई विस्तृत जांच के बाद उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में चिह्नित कुल 34 अचल संपत्तियों पर कार्रवाई का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है.
दरअसल, LUCC के पदाधिकारियों पर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में जनता से अवैध रूप से धन एकत्र करने, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और अनियमित जमा योजनाओं के संचालन जैसे गंभीर आरोप हैं. इन आरोपों के कारण बड़ी संख्या में जमाकर्ताओं को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. लंबे समय से पीड़ित जमाकर्ता अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं.
34 अचल संपत्तियां चिह्नित: मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच CBI की एंटी करप्शन ब्रांच देहरादून को सौंपी गई थी. जांच के दौरान एजेंसी ने LUCC से जुड़े कई वित्तीय और संपत्ति संबंधी पहलुओं की पड़ताल की. जांच के आधार पर CBI ने आरोपियों से जुड़ी कुल 34 अचल संपत्तियों को चिह्नित करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की. इनमें उत्तराखंड के देहरादून में 6, उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी और जालौन जिलों में 20, महाराष्ट्र के नवी मुंबई और ठाणे में 8 संपत्तियां शामिल हैं.
सीबीआई की जांच रिपोर्ट के बाद आगे बढ़ी सरकार: सीबीआई की जांच रिपोर्ट के बाद उत्तराखंड सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए BUDS Act 2019 के तहत कार्रवाई आगे बढ़ा दी है. राज्य सरकार ने अधिनियम की धारा 7(1) के अंतर्गत सचिव वित्त उत्तराखंड शासन को सक्षम प्राधिकारी नामित किया है. इसी आधार पर अब चिन्हित संपत्तियों की कुर्की और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
देहरादून में 6 अचल संपत्तियों की कुर्की की तैयारी: सरकारी आदेश के मुताबिक, देहरादून में स्थित 6 अचल संपत्तियों को अंतरिम रूप से कुर्क करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं. इसके साथ ही इन संपत्तियों को स्थायी रूप से कुर्क करने और भविष्य में उनकी नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिसूचित न्यायालय में प्रार्थना पत्र भी पेश कर दिया गया है. यह प्रार्थना पत्र 18 जून 2026 को प्रथम अपर जिला न्यायालय देहरादून में दाखिल किया गया.
सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि, अन्य राज्यों में स्थित संपत्तियों को लेकर भी कार्रवाई तेज कर दी गई है. उत्तर प्रदेश में चिह्नित 20 अचल संपत्तियों को अंतिम रूप से कुर्क करने से पहले संबंधित अधिसूचित न्यायालय से अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसके लिए भी 18 जून को आवश्यक प्रार्थना पत्र भेजे गए हैं. न्यायालय की अनुमति मिलते ही इन संपत्तियों को अंतिम रूप से कुर्क करने के आदेश जारी किए जाएंगे.
महाराष्ट्र के नवी मुंबई और ठाणे में स्थित 8 अचल संपत्तियों को लेकर मांगी गई जानकारी: इसी तरह महाराष्ट्र के नवी मुंबई और ठाणे में स्थित 8 अचल संपत्तियों के संबंध में भी संबंधित न्यायालय से अनुमति मांगी गई है. अनुमति मिलते ही इन संपत्तियों पर भी अंतिम कुर्की की कार्रवाई की जाएगी. इसके बाद नियमानुसार नीलामी और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ाई जाएंगी.
यह कार्रवाई सिर्फ संपत्तियों की कुर्की तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य उन जमाकर्ताओं को राहत पहुंचाना है. जिनकी जीवनभर की बचत इस कथित घोटाले में फंस गई थी. BUDS Act के प्रावधानों के तहत कुर्क की गई संपत्तियों की नीलामी से प्राप्त धनराशि का उपयोग पीड़ित जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा और उनकी राशि लौटाने के लिए किया जा सकता है.
राज्य सरकार के ताजा कदम यह संकेत देते हैं कि LUCC प्रकरण को अब केवल आपराधिक जांच के दायरे में नहीं रखा जा रहा, बल्कि पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए आर्थिक व कानूनी मोर्चे पर भी समानांतर कार्रवाई की जा रही है. सीबीआई की जांच और उसके आधार पर शुरू हुई यह कुर्की प्रक्रिया पूरे मामले में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई मानी जा रही है.
सरकार का कहना है कि अवैध रूप से जनता का धन एकत्र कर उसका दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी. साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रभावित जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा हो और उन्हें न्याय मिल सके. ऐसे में आने वाले दिनों में न्यायालयों से अनुमति मिलने के बाद कई राज्यों में फैली इन संपत्तियों पर और बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है.
“सीबीआई की ओर से आरोपियों की संपत्ति को कुर्क करने की संस्तुति राज्य को भेजी गई है. जिस पर आगे की कार्रवाई तेजी से की जा रही है.”- दिलीप जावलकर, वित्त सचिव, उत्तराखंड
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