अविरल-निर्मल गंगा के लिए जनभागीदारी जरूरी : डॉ. शैलेन्द्र –

देहरादून,। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। अविरल और निर्मल गंगा के लिए सरकार के साथ समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा धार्मिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जल के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है, इसलिए प्रत्येक नागरिक को जल प्रहरी की भूमिका निभानी होगी।गंगा समग्र देहरादून की ओर से आयोजित जल संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए डॉ. शैलेन्द्र ने कहा कि देहरादून में पिछले वर्ष आई आपदा ने प्राकृतिक जलधाराओं और उनके प्रवाह क्षेत्रों में हुए अनियोजित निर्माण की गंभीरता को सामने ला दिया है। कई स्थानों पर नदी के प्रवाह क्षेत्र तक होटल, मकान और अन्य निर्माण किए गए हैं। प्राकृतिक जलधाराओं को बाधित कर उन्हें नालों और नालियों में बदलने की प्रवृत्ति पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और वर्षाजल संचयन से जुड़ी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वर्षाजल को जमीन में पहुंचाने की दिशा में किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जल के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पीने योग्य पानी का उपयोग मुख्य रूप से पेयजल के लिए किया जाना चाहिए, जबकि अपेक्षाकृत कम गुणवत्ता वाले पानी का इस्तेमाल स्नान, कपड़े धोने, सफाई और सिंचाई जैसे कार्यों में किया जा सकता है। कृषि क्षेत्र में ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से पानी की उपयोग दक्षता बढ़ाई जा सकती है।डॉ. शैलेन्द्र ने प्लास्टिक प्रदूषण को भी गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि तीर्थस्थलों और धार्मिक यात्राओं में प्लास्टिक की बोतलों तथा अन्य कचरे की बढ़ती मात्रा चिंता का विषय है। केवल सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रदूषणकारी वस्तुओं को धार्मिक स्थलों तक पहुंचने से रोकने के लिए भी प्रभावी प्रयास करने होंगे। उन्होंने संतों, धर्माचार्यों और धार्मिक संस्थाओं से पर्यावरण संरक्षण को लेकर समाज में व्यापक जागरूकता पैदा करने का आह्वान किया।घर और गांव से शुरू हो जल संरक्षणपर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री राम सिंह कैड़ा ने कहा कि जल संरक्षण की शुरुआत घर और गांव से होनी चाहिए। जलस्रोतों की सुरक्षा, नदियों की स्वच्छता, बेहतर कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नदी किनारे सफाई के साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कूड़ा, गंदा पानी और प्लास्टिक नदियों तक न पहुंचे।उन्होंने कहा कि वर्षाजल संरक्षण, छोटे जलस्रोतों, नालों और जलागम क्षेत्रों को बचाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। जलस्रोत बचेंगे, तभी नदियां और पर्यावरण सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने रिस्पना, बिंदाल और सुसवा समेत अन्य जलस्रोतों को स्वच्छ रखने का संकल्प लेने का आह्वान किया।कैड़ा ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में कई नौले और झरने सूखने के कगार पर हैं। प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण के लिए पौधरोपण के साथ-साथ उनके पुनर्जीवन और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।पूरे जलतंत्र के संरक्षण से ही बचेगी गंगागंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष ने कहा कि गंगा संरक्षण केवल पर्यावरण अथवा जल संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। बड़ी नदियां छोटी-छोटी धाराओं और सहायक नदियों से मिलकर बनती हैं। इसलिए गंगा को बचाने के लिए उसके पूरे जलतंत्र का संरक्षण आवश्यक है। गंगा को केवल हरिद्वार, ऋषिकेश, प्रयागराज या वाराणसी तक सीमित दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।उन्होंने कहा कि ग्लेशियरों में बदलाव, वर्षा के स्वरूप में परिवर्तन और भूजल के अत्यधिक दोहन से प्राकृतिक जलचक्र प्रभावित हो रहा है। ऐसी परिस्थितियों में छोटी धाराओं, प्राकृतिक जलस्रोतों और नदी के जलग्रहण क्षेत्रों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा।रामाशीष ने नियोजित विकास के अभाव और विकृत श्रद्धा को भी नदी संरक्षण के सामने बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए आस्था को प्रकृति के अनुकूल बनाने की आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से गंगा की स्वच्छता और सीवेज प्रबंधन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इन प्रयासों को स्थायी सफलता तभी मिलेगी जब समाज भी सक्रिय भागीदारी निभाए। नदी किनारे अतिक्रमण रोकने, हरित क्षेत्र विकसित करने, प्लास्टिक के उचित निस्तारण तथा सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को नदियों में जाने से रोकने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।प्रकृति संरक्षण के लिए मिलकर करना होगा प्रयासकार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. डी.डी. चौधरी ने कहा कि मैदान हो या पहाड़, हर क्षेत्र में सामूहिक प्रयासों के माध्यम से प्रकृति का संरक्षण करना होगा। उन्होंने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को भविष्य की पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक बताया।कार्यक्रम में गंगा समग्र के अमरीश कुमार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय सामाजिक समरसता संयोजक लक्ष्मी प्रसाद जयसवाल, विभाग सह कार्यवाह अरुण, विभाग सह प्रचारक सौरभ, भारत, देवराज, मनीष बागड़ी, सर्वजीत ओझा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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