हरिपुर का पुनरुत्थान: आचार्य प्रवेश शर्मा की 4 साल की तपस्या लाई रंग

₹7.3 करोड़ के भव्य घाटों के शिलान्यास पर सीएम धामी और स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सराहा
​देहरादून/हरिपुर। देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत सदियों पुरानी है, लेकिन कालचक्र के प्रभाव में कई प्राचीन तीर्थ उपेक्षित रह गए। इन्हीं में से एक ऐतिहासिक तीर्थ ‘हरिपुर’ (कालसी) अब अपने खोए हुए प्राचीन वैभव को पुनः प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है। यमुना और अमलावा नदी के पावन संगम पर स्थित हरिपुर में ₹7.3 करोड़ की लागत से बनने वाले आधुनिक एवं सुसज्जित घाटों के शिलान्यास के साथ ही एक नया इतिहास रचा गया।
​इस ऐतिहासिक पल के केंद्र में रहे जौनसार-बावर की माटी के लाल और उत्तराखंड के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आचार्य प्रवेश शर्मा। निरंतर चार वर्षों के कठिन परिश्रम, निस्वार्थ सेवा और जन-जागरण के दम पर हरिपुर को राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने वाले आचार्य प्रवेश शर्मा के प्रयासों की राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती (मुनि जी) ने मुक्तकंठ से सराहना की।

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बढ़ाया उत्साह
​शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने आचार्य प्रवेश शर्मा के समर्पण का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी बड़े बदलाव की नींव में समाज के समर्पित व्यक्तियों का संकल्प होता है।
​मुख्यमंत्री ने आचार्य प्रवेश शर्मा को मुख्य आचार्य के रूप में सम्मानित करते हुए आश्वस्त किया:
​”हरिपुर के आध्यात्मिक उत्थान और यमुना आरती को निरंतर गति देने के लिए आप जिस निष्ठा से जुटे हैं, वह वंदनीय है। आप निरंतर लगे रहिए, सरकार और पूरा प्रदेश आपके साथ मजबूती से खड़ा है।”
​मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ₹7.3 करोड़ की लागत से बनने वाले ये घाट न केवल श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्नान व पूजा-अर्चना की सुविधा देंगे, बल्कि यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित होकर स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के नए मार्ग भी खोलेगा।
​संत समाज का मिला पूर्ण आशीर्वाद
​ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती जी ने हरिपुर घाटों के कायाकल्प को उत्तराखंड के धार्मिक इतिहास का स्वर्णिम अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यमुना तटों की स्वच्छता और दिव्यता की पुनर्स्थापना के लिए स्थानीय नेतृत्व का आगे आना एक शुभ संकेत है।
​स्वामी जी ने आचार्य प्रवेश शर्मा के सेवा भाव को रेखांकित करते हुए कहा कि संतों का आशीर्वाद हमेशा उनके साथ है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में हरिपुर घाट पर होने वाली दैनिक यमुना महाआरती हरिद्वार की गंगा आरती की भांति देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी।
​4 वर्षों की मौन साधना और जीएसआर फाउंडेशन की भूमिका
​हरिपुर का इतिहास महाभारत काल और सम्राट अशोक के शिलालेखों से जुड़ा हुआ है, किंतु लंबे समय से यह संगम उपेक्षित था। ऐसे समय में आचार्य प्रवेश शर्मा ने इस पावन भूमि को उसका गौरव वापस दिलाने का बीड़ा उठाया।
​विगत 4 वर्षों से आचार्य प्रवेश शर्मा ने बिना किसी सरकारी या बड़े वित्तीय सहयोग के, शून्य से शुरुआत करते हुए हरिपुर घाट पर नियमित यमुना आरती की परंपरा शुरू की। उनके नेतृत्व में गठित जीएसआर फाउंडेशन और यमुना आरती सेवा समिति ने दिन-रात एक कर इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया।
​नियमित स्वच्छता अभियान: यमुना और अमलावा संगम को प्लास्टिक और कचरे से मुक्त रखने के लिए साप्ताहिक श्रमदान।
​सांस्कृतिक पुनर्जागरण: स्थानीय युवाओं और पुरोहितों को जोड़कर वैदिक विधि-विधान से दैनिक महाआरती का संचालन।
​जन-जागरण: जौनसार-बावर से लेकर देहरादून और राष्ट्रीय स्तर तक हरिपुर के ऐतिहासिक महत्व को स्थापित करना।
​जौनसार-बावर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक बधाई का तांता​शिलान्यास समारोह के दौरान जब मंच से हरिपुर के पुनरुद्धार की चर्चा हुई, तो उपस्थित जनसमूह के मुख पर आचार्य प्रवेश शर्मा और उनकी समिति का ही नाम था। स्थानीय नागरिकों, ग्राम प्रधानों, सामाजिक संगठनों के साथ-साथ प्रदेश स्तर के प्रबुद्ध जनों ने आचार्य प्रवेश शर्मा को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
​क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि आचार्य प्रवेश शर्मा ने जौनसार-बावर की धरती का नाम रोशन किया है। उनका यह प्रयास साबित करता है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो सदियों पुरानी उपेक्षित विरासत को भी नई संजीवनी दी जा सकती है।
​धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
​हरिपुर घाटों का कायाकल्प केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में भी बड़ा बदलाव लाएगा।
​चारधाम मार्ग पर प्रमुख पड़ाव: विकासनगर-कालसी क्षेत्र से होकर गुजरने वाले चारधाम यात्रियों और चकराता आने वाले पर्यटकों के लिए हरिपुर एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बनेगा।
​रोजगार के अवसर: घाटों के आधुनिक निर्माण से पूजा सामग्री, होटल, होमस्टे और परिवहन से जुड़े स्थानीय व्यवसायों में तेजी आएगी।
​सांस्कृतिक संरक्षण: जौनसार-बावर की समृद्ध लोक संस्कृति और वैदिक सनातन परंपरा का अनूठा संगम यहां देखने को मिलेगा।
​हरिपुर की पावन धारा पर शुरू हुआ यह महायज्ञ अब सरकारी संकल्प और संत समाज के आशीर्वाद से पूर्णता की ओर बढ़ रहा है, जिसका श्रेय निश्चित तौर पर आचार्य प्रवेश शर्मा और उनकी टीम की निष्काम सेवा को जाता है।

shivani Rawat

Share
Published by
shivani Rawat

Recent Posts

कुंभ-2027 के लिए एनवायरमेंट बाबा ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को दिया आमंत्रण

देहरादून:  कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी से आज उनके शासकीय आवास पर पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री…

3 minutes ago

सोमेश्वर में रेखा आर्या की धन्यवाद रैली में उमड़ा जनसैलाब, जनता के समर्थन पर हुईं भावुक –

सोमेश्वर। सोमेश्वर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित धन्यवाद रैली में कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक रेखा…

51 minutes ago

Rapid changes in nature are of serious concern: Dr. Anil Prakash Joshi

28th day of Prakriti Path Yatra my uttarakhand news Bureau Barabanki, 29 Oct: Carrying the…

2 hours ago

13 नवंबर को होगा तृतीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन, देश-विदेश में रह रहे प्रवासियों को मिलेगा अपनी मातृभूमि से जुड़ने का मंच

13 नवंबर को होगा तृतीय प्रवासी उत्तराखंडी सम्मेलन, देश-विदेश में रह रहे प्रवासियों को मिलेगा…

2 hours ago

Heavy rain in Mussoorie fails to deter RSS ‘Path Sanchalan’

my uttarakhand news Bureau Mussoorie, 29 Oct: Even heavy rain in Mussoorie could not diminish…

2 hours ago