मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में प्रतिभाग किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बैठक में ऋषिकेश बाईपास, अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग, ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग और अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग के निर्माण से संबंधित प्रस्तावों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित राज्य के अनेक महत्वपूर्ण मामलों को प्रमुखता से उठाते हुए राज्य के प्रस्तावों को स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया।
बैठक में राज्य की प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं पर हुई चर्चा में बताया गया कि ऋषिकेश बाईपास परियोजना-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-07 के अंतर्गत तीनपानी से योगनगरी होते हुए खारास्रोत तक 12.67 किमी लंबाई में चार लेन बाईपास का निर्माण प्रस्तावित है। जिसकी अनुमानित लागत 1161.27 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के अंतर्गत 4.876 किमी लंबाई में तीन हाथी कॉरिडोर हेतु एलिवेटेड मार्ग, चन्द्रभागा नदी पर 200 मीटर लंबा सेतु तथा रेलवे पोर्टल पर 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त श्यामपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 318 करोड़ रुपये की लागत से 76 मीटर लंबाई का आरओबी प्रस्तावित किया गया है। जिससे नेपाली फार्म से ऋषिकेश नटराज चौक तक यातायात निर्बाध हो सकेगा। अल्मोड़ा-दन्या-पनार-घाट मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309बी के 76 किमी लंबाई वाले हिस्से में 988 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से दो लेन चौड़ीकरण का प्रस्ताव किया गया है।
ज्योलिकोट-खैरना-गैरसैंण-कर्णप्रयाग मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-109 के अंतर्गत 235 किमी लंबाई में दो लेन चौड़ीकरण का संरेखण प्रस्ताव है।
अल्मोड़ा-बागेश्वर-काण्डा-उडियारी बैंड मार्ग-राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-309ए के अंतर्गत पैकेज 1, 2 और 5 में कुल 84.04 किमी लंबाई में 1001.99 करोड़ रुपये की लागत से कार्य प्रस्तावित हैं। काण्डा से बागेश्वर खंड (पैकेज-02) के लिए वनभूमि हस्तांतरण प्रस्ताव पर भारत सरकार की स्वीकृति मिल चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में सड़क अवसंरचना को विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य हुए हैं।
चारधाम यात्रा को सुगम, सुलभ एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय राजमार्गों पर 12,769 करोड़ रुपए की चारधाम महामार्ग परियोजना स्वीकृत की गई है। उत्तराखण्ड में कुल 3,723 किलोमीटर का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क राज्य को देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ रहा है। इनमें से लगभग 597 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई द्वारा डिज़ाइन एवं क्रियान्वित किए गए हैं, जिनमें से 336 किलोमीटर से अधिक परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। लगभग 193 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसकी अनुमानित लागत 15,890 रुपये करोड़ से अधिक है। इन परियोजनाओं के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, रुद्रपुर, काशीपुर, हल्द्वानी और काठगोदाम जैसे धार्मिक, शहरी और औद्योगिक केंद्रों को चौड़ी, सुरक्षित एवं सुगम सड़कों से जोड़ा गया है। काशीपुर-सितारगंज (77 किमी), रुद्रपुर-काठगोदाम (50 किमी) तथा हरिद्वार-नगीना (67 किमी) जैसे चार-लेन कॉरिडोर से औद्योगिक क्षेत्रों, कृषि मंडियों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर के अंतर्गत गणेशपुर-देहरादून खंड में लगभग 30 किमी लंबा छह-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे विकसित किया गया है, जिसमें सुरंग और 18 किमी लंबा एलिवेटेड सेक्शन भी शामिल है। इस परियोजना पर 1,995 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अतिरिक्त देहरादून बाईपास (12 किमी, 716 करोड़ रुपये) और हरिद्वार बाईपास (15 किमी, 1,603 करोड़ रुपये) जैसी परियोजनाओं से शहरी क्षेत्रों में यातायात दबाव में कमी लाने में प्रभावी सिद्ध होंगे। भारत-नेपाल सीमा पर बनबसा आईसीपी कनेक्टिविटी को 4 किमी लंबाई और 366 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय आवागमन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। वहीं रुद्रपुर-काशीपुर बाईपास तथा हरिद्वार से दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे उत्तराखण्ड को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से सीधे जोड़ रहे हैं।
सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य में ब्लैक स्पॉट सुधार, क्रिटिकल जंक्शनों पर एक्सेस कंट्रोल, प्रभावी साइनेज और आधुनिक रोड सेफ्टी उपाय लागू किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में ऑपरेशन और मेंटेनेंस परियोजनाओं के माध्यम से सड़कों को वर्षभर सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मसूरी-देहरादून कनेक्टिविटी (40 किमी, 4,000 करोड़ रुपये), हरिद्वार-हल्द्वानी हाई-स्पीड कॉरिडोर (197 किमी, 10,000 करोड़ रुपये), ऋषिकेश बाईपास (13 किमी, 1,200 करोड़ रुपये), देहरादून रिंग रोड तथा लालकुआं-हल्द्वानी-काठगोदाम बाईपास जैसी परियोजनाएं तैयारी एवं डीपीआर चरण में हैं। इनसे गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों की आपसी कनेक्टिविटी को नई गति मिलेगी। पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में एलिवेटेड रोड, वाइल्डलाइफ अंडरपास और न्यूनतम भूमि उपयोग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं, जिससे विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बना रहे।
सिलक्यारा-पोलगांव सुरंग में सिविल कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। इस प्रतिशत सिविल कार्य में सुरंग के बीचों-बीच दीवार निर्माण का काम पांच-छह माह में पूरा कर लिया जाएगा और इसके बाद इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल कार्य शुरू किया जाएगा। मार्च 2027 तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है।
बैठक में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर समुचित कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में गतिमान परियोजनाओं को गुणवत्ता बनाए रखते हुए तेज गति से निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत पूर्ण किया जाए।
बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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