PM Modi के ड्रीम प्रोजेक्ट में रिवर फ्रंट कार्य रुके
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ड्रीम परियोजना बदरीनाथ महायोजना के तहत अलकनंदा नदी किनारे निर्माणाधीन रिवर फ्रंट कार्यों को फिलहाल रोक दिया गया है। यह रोक बदरीनाथ मंदिर के नीचे तप्त कुंड से लेकर ब्रह्मकपाट तीर्थ तक चल रहे हिस्से पर लगाई गई है। अब तक इस परियोजना पर लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय की विशेषज्ञ टीम अलकनंदा नदी के मूल प्रवाह और तप्त कुंड के प्राकृतिक जल स्रोत पर संभावित प्रभावों का अध्ययन कर रही है। मौजूदा डिजाइन से तप्त कुंड के गर्म पानी के स्रोत के दिशा बदलने और धाम की संरचना पर असर की आशंका के चलते यह कदम उठाया गया है। समीक्षा पूरी होने के बाद रिवर फ्रंट कार्यों को संशोधित योजना के तहत फिर से शुरू किया जाएगा।


बदरीनाथ महायोजना के लिए पीएमओ को भेजी नई योजना
बदरीनाथ महायोजना के तहत अलकनंदा नदी के किनारे बामणी गांव के पास रिवर फ्रंट निर्माण कार्य को फिलहाल रोक दिया गया है। मानसून के दौरान तप्त कुंड और नारद कुंड के नीचे पुरानी सुरक्षा दीवार के गिरने से ब्रह्मकपाल क्षेत्र में पानी भर गया था, जिसके बाद प्रोजेक्ट इंप्लीमेंट यूनिट (PIU) की चिंताएं बढ़ गईं। फिलहाल रिवर फ्रंट टू नाम देकर इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजा गया है, जहां नई कार्ययोजना पर समीक्षा चल रही है। लोक निर्माण विभाग के अधीशासी अभियंता योगेश मनराल के अनुसार, विशेषज्ञ टीम मंदिर के नीचे रिवर फ्रंट क्षेत्र का अध्ययन कर रही है ताकि नारद कुंड, नारद शिला और आसपास के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान अलकनंदा नदी के मूल प्रवाह स्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जा रही है और अंतिम स्वीकृति के बाद कार्य दोबारा शुरू किया जाएगा।


बदरीनाथ सुंदरीकरण में अब तक 200 करोड़ खर्च
प्रधानमंत्री मोदी की महत्वाकांक्षी बदरीनाथ महायोजना का प्रारूप वर्ष 2014 में तैयार किया गया था और इसका कार्य वर्ष 2022 में शुरू हुआ। इस योजना के प्रथम चरण में सड़कों का विस्तार, एराइवल प्लाजा, सिविक एमेनिटी सेंटर तथा बदरीश और शेषनेत्र झील का सुंदरीकरण किया गया। दूसरे चरण में रिवर फ्रंट, अस्पताल और लूप रोड निर्माण पर कार्य जारी है, जिसमें अलकनंदा नदी किनारे ईवी ट्रेक भी शामिल है। परियोजना पर कुल 400 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिनमें से करीब 200 करोड़ रुपये अब तक उपयोग हो चुके हैं। अंतिम चरण में मंदिर परिसर के आसपास 75 मीटर क्षेत्र में सुंदरीकरण का कार्य प्रस्तावित है, जिसके लिए 72 भवनों को हटाया जाना है। फिलहाल 22 भवन स्वामियों ने परिसर खाली नहीं किया है, जिससे कार्य की गति प्रभावित हो रही है।

लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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