उत्तराखंड UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर बदल गए नियम, आधार पर बड़ा अपडेट; हुए ये बदलाव – myuttarakhandnews.com

उत्तराखंड सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) में पहचान पत्र सहित लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को सरल बनाने के लिए बड़े बदलावों को मंजूरी दी है. अब यूसीसी पोर्टल में पंजीकरण के लिए आधार कार्ड के साथ पासपोर्ट, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज भी मान्य होंगे. इसके अलावा सरकार ने लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए सुरक्षा उपायों को बढ़ाया गया है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता (चतुर्थ संशोधन) नियमावली को मंजूरी दी है. सीएम से हरी झंडी के बाद गृह विभाग ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है. इसके तहत नई नियमावली को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है. गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नए बदलाव के तहत पहचान के प्रमाण की परिभाषा में बदलाव किया गया है.
आधार की अनिवार्यता खत्मनई अधिसूचना के बाद यूसीसी में पहचान का प्रमाण का अर्थ केवल आधार कार्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पासपोर्ट, वोटर आईडी, राशन कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, केंद्र या राज्य सरकार की ओर से जारी अन्य वैध दस्तावेजों को भी जोड़ा गया है. कई नियमों में जहां पहले आधार संख्या या आधार शब्द का उल्लेख था, वहां अब इसे ‘पहचान का प्रमाण’ शब्द से रिप्लेस कर दिया गया है.
क्या-क्या हुए संशोधन?विवाह रजिस्ट्रेशन और कानूनी उत्तराधिकारियों की घोषणा के मामलों में उप-निबंधक को पंजीकरण कर्ताओं से अतिरिक्त सूचना मांगने के लिए पांच दिन का समय दिया गया है. इसके अलावा तत्काल के मामलों में यह समय 24 घंटे के लिए निर्धारित कर दिया गया है. सचिव गृह विभाग शैलेश बगौली ने कहा कि समान नागरिक संहिता (चतुर्थ संशोधन) नियमावली, उत्तराखंड 2025 को सीएम ने विचलन के माध्यम से मंजूरी दी है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि विधिवत संस्तुति के लिए इसे अगली कैबिनेट बैठक में पेश किय जाएगा.
अपील के लिए बढ़ी दिनों की संख्यालिव-इन रिलेशनशिप के रजिस्ट्रेशन से संबंधित नियमों में भी बदलाव किए गए हैं. रजिस्ट्रेशन आवेदन की प्राप्ति के 30 दिनों के अंदर महानिबंधक नामित अधिकारी से संक्षप्ति जांच कराएंगे. रजिस्ट्रेशन अप्लीकेशन नामंजूर होने करने पर निबंधक को आदेश में यह उल्लेख करना होगा कि महानिबंधक के समक्ष 45 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है. पहले यह अवधि 30 दिन थी, जिसे बढ़ाकर अब 45 दिन कर दिया गया है. लिव-इन में रजिस्ट्रेशन कराने वालों की सुरक्षा की दृष्टि से अन्य बदलाव भी किए गए हैं.

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