दहेज, जल-जंगल-जमीन और पलायन पर एनएसएस शिविर में गंभीर चर्चा – my uttarakhand news

 
चमोली ( प्रदीप लखेड़ा )
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आलम सिंह फरस्वाण राजकीय महाविद्यालय तलवाड़ी थराली में राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय विशेष शिविर का तृतीय एवं चतुर्थ दिवस बहुत उत्साहपूर्वक मनाया गया, योगगुरु कुशलानंद सती, ज्योति चिनवान एवं संजीवनी ने योग सिखाते हुए जीवन में योग का महत्व बताया।
स्वयंसेवियों द्वारा अभिगृहीत तलवाड़ी-खालसा- मायधार ग्राम में प्राकृतिक जल संसाधन के स्रोत नौले की साफ-सफाई की गई एवं नशा नहीं रोजगार दो, जन-जन की पुकार है, वोट देना अधिकार है, शिक्षा, स्वास्थ्य और पानी, ये सब हैं जीवन की कहानी, युवा शक्ति, राष्ट्र की शक्ति, नया सवेरा लाएँगे, एनएसएस के साथ राष्ट्र बनाएँगे, स्वच्छता की ओर कदम, एनएसएस का है संकल्प, स्वयं सजे वसुन्धरा-संवार दें, शिक्षा, सेवा और संस्कार, एनएसएस का यही सार आदि नारे लगाकर अपने क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाया।
राष्ट्रीय सेवा योजना के सदस्य मोहित उप्रेती ने बताया कि नौले पारंपरिक जल संचयन प्रणाली के स्रोत है जो वर्तमान में संकट की स्थिति में है जिसका संरक्षण भविष्य के लिए आवश्यक है, बौद्धिक सत्र में हैशटैग बिलीवर फाउण्डेशन की सुश्री कंचन रावत ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना एक बड़ा मंच है अतः जीवन में बड़ा उद्देश्य रखें एवं अपने ज्ञान और व्यवहार को सामाजिक हित में लगाए।
राजनीति विज्ञान के विभाग प्रभारी डॉ. ललित जोशी ने कहानी के माध्यम से सामूहिकता एवं विविधता की सीख दी, उन्होंने कहा कि एन एस एस सहित समग्र रूप से शिक्षा का लक्ष्य बेहतर देश और समाज रचना है, चतुर्थ दिवस स्वयंसेवी ने अधिगृहीत ग्राम में श्रमदान किया और गुडम स्टेट में जागरूकता अभियान चलाया।
महिला संगठनों के साथ मिलकर नशा, दहेज, जल, जंगल, जमीन, धार्मिक कुरीतियाँ एवं पलायन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा की एवं तलवाड़ी बाजार के वरिष्ठ नागरिकों को एनएसएस के उद्देश्य से अवगत कराया, राष्ट्रीय सेवा योजना की सदस्य सुधा राणा जी ने छात्र जीवन में अनुशासन की भूमिका पर प्रकाश डाला‌।
बौद्धिक सत्र में इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अनुज कुमार ने ‘सिल्क रूट’ का व्यापारिक एवं ऐतिहासिक महत्व पर विस्तारपूर्वक बताया, संवाद परिचर्चा के रूप में हुआ, अतः स्वयंसेवियों ने जीवंतता के साथ अनेक प्रश्न पूछे, समाजशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहित उप्रेती ने उत्तराखंड के जल, जंगल,ज़मीन के सवालों और ऐतिहासिक रुट भारत तिब्बत व्यापार मार्ग के सांस्कृतिक पहलुओं से परिचित कराया।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. खेमकरण ने बौद्धिक सत्र में आए अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर आभार व्यक्त किया, बौद्धिक सत्र का संचालन एनएसएस विशेष शिविर की सह-संयोजक और संस्कृत विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर रजनी नेगी ने किया।

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