भ्रष्टाचार के दागदार अफसरों को ड्रीम प्रोजेक्ट की कमान, सिंचाई विभाग की तैनाती पर उठे गंभीर सवाल – पर्वतजन

उत्तराखंड में सिंचाई विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां करोड़ों रुपये के कथित घपलों के आरोप झेल रहे अधिकारियों को केंद्र और राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी परियोजनाओं की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। मामला इसलिए और संवेदनशील हो जाता है क्योंकि इन अधिकारियों की तैनाती शासन या संबंधित मंत्री की स्वीकृति से नहीं, बल्कि विभाग के प्रमुख अभियंता द्वारा नियमों को दरकिनार कर की गई बताई जा रही है।
 
इस पूरे मामले को लेकर आरोप किसी विपक्षी दल ने नहीं, बल्कि भारतीय जनता युवा मोर्चा उत्तराखंड के जिला उपाध्यक्ष, पिथौरागढ़ (अनुसूचित जनजाति) कमल दास ने लगाए हैं। उन्होंने सिंचाई विभाग के तीन अधिकारियों के नाम और उनकी कथित कारगुजारियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजा है। पत्र में भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे अधिकारियों की तैनाती को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है।

 
कमल दास की शिकायत में कहा गया है कि सिंचाई विभाग और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में विवादित और जांच के दायरे में चल रहे अधिकारियों को जिम्मेदार पदों पर बैठाना बेहद चिंताजनक है। इससे न सिर्फ हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि राज्य सरकार की ईमानदार और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर भी संदेह पैदा हो रहा है।
 
शिकायत के अनुसार प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में शारदा कॉरिडोर, हरिद्वार गंगा कॉरिडोर और ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर के तहत उत्तराखंड में करीब 15 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग के अधीन उत्तराखंड परियोजना विकास एवं निर्माण निगम लिमिटेड (UPDCCL) को सौंपी गई है, जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट यानी पीआईयू का गठन किया गया है।
 
यहीं से विवाद की शुरुआत होती है। आरोप है कि इन बड़ी परियोजनाओं के लिए सिंचाई विभाग से तीन ऐसे अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है, जिन पर पहले से करोड़ों रुपये के घोटालों के आरोप लगे हैं। इन मामलों में एसआईटी जांच चल रही है और शासन स्तर से आरोप पत्र भी जारी किए जा चुके हैं।
 
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जांच के दायरे में चल रहे अधिकारियों को ही इतनी अहम परियोजनाओं की कमान सौंपी जाएगी, तो विकास कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित होगी। साथ ही यह भी चिंता जताई जा रही है कि यदि सिंचाई विभाग में इसी तरह कथित भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलता रहा, तो विकास का लाभ आम जनता तक पहुंचने के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सिमट कर रह जाएगा।

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