ऋषिकेश,। मधुमेह, हृदय रोग, गुर्दा रोग और मोटापा तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियां हैं। इन बीमारियों के बीच गहरे संबंध को देखते हुए मरीजों के उपचार में समग्र चिकित्सा दृष्टिकोण अपनाना जरूरी हो गया है। इसी दिशा में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), ऋषिकेश में 24 अक्टूबर को कार्डियो डायबेटिक सोसाइटी (सीडीएस) का सातवां वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। एम्स के इंटरनल मेडिसिन विभाग के तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन में देशभर के चिकित्सा विशेषज्ञ बीमारियों की समय पर पहचान, प्रभावी उपचार और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के उपायों पर मंथन करेंगे।एक बीमारी नहीं, संपूर्ण स्वास्थ्य पर रहेगा जोरमधुमेह से पीड़ित मरीजों में हृदय और गुर्दे संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। वहीं, मोटापा भी इन बीमारियों के विकसित होने और उनकी गंभीरता बढ़ने का प्रमुख कारक है। ऐसे में मरीज के उपचार के दौरान केवल एक बीमारी पर ध्यान देने के बजाय उसके संपूर्ण स्वास्थ्य का आकलन करना महत्वपूर्ण है।सम्मेलन में बीमारी की समय रहते पहचान, आवश्यक जांच, उचित उपचार और नियमित चिकित्सकीय निगरानी के माध्यम से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर चर्चा होगी। विशेषज्ञ मधुमेह नियंत्रण के साथ हृदय और गुर्दे को स्वस्थ रखने तथा उपचार की प्रभावशीलता बढ़ाने के व्यावहारिक पहलुओं पर भी विचार साझा करेंगे।16 से अधिक चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ लेंगे भागसम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष एवं एम्स ऋषिकेश के मेडिसिन विभागाध्यक्ष प्रो. रविकांत ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न चिकित्सा संस्थानों की विशेषज्ञता और अनुभवों को एक मंच पर लाकर मरीजों के उपचार को अधिक प्रभावी बनाना है।उन्होंने बताया कि देश के उत्तर, मध्य, पूर्व और दक्षिण क्षेत्रों के 16 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ सम्मेलन में भाग लेंगे। इस दौरान चिकित्सा विशेषज्ञ मधुमेह और उससे संबंधित बीमारियों के बेहतर प्रबंधन, नवीन उपचार पद्धतियों तथा मरीजों को समन्वित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।व्यावहारिक प्रशिक्षण से बढ़ेगी चिकित्सकीय दक्षतासम्मेलन से पहले प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यक्रम के तहत मरीजों के बेड के पास अल्ट्रासाउंड जांच करने की व्यावहारिक कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इस हैंड्स-ऑन कार्यशाला में चिकित्सकों को अल्ट्रासाउंड तकनीक का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे मरीजों की स्थिति का आकलन करने और उपचार संबंधी निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।समय पर जांच से गंभीर जटिलताओं का जोखिम घटाने पर जोरकार्डियो डायबेटिक सोसाइटी हृदय रोग विज्ञान और मधुमेह विज्ञान के क्षेत्र में बीमारियों की समय पर पहचान तथा प्रभावी उपचार को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है। सम्मेलन में हृदय रोग और मधुमेह के साथ गुर्दा रोग तथा मोटापे से जुड़े पहलुओं को भी समग्र चिकित्सा दृष्टिकोण के तहत शामिल किया जाएगा।विशेषज्ञों के आपसी संवाद और अनुभवों के आदान-प्रदान से मरीजों को अधिक बेहतर, समन्वित और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में नए उपायों पर विचार किया जाएगा। सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य केवल बीमारियों को नियंत्रित करना ही नहीं, बल्कि गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाना भी है।
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