शिवप्रसाद सेमवाल की हुई जीत ,सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करवायी एफआईआर – myuttarakhandnews.com


देहरादून :यह था मामलादेहरादून स्थित एक पुल के निर्माण का स्थान एक कंपनी को फायदा पहुंचने के लिए बदल दिया गया था। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। लगातार ग्रामीण आदोलनरत थे। तत्कालीन मुख्य मंत्री त्रिवेंद्र रावत ने इस कंपनी के सिलन्यास कार्यक्रम मे गये तो पर्वतजन ने इसको लेकर ग्रामीणों के एतराज को रेखांकित करते हुए खबर प्रकाशित की थी।इस मामले मे आदोलन ग्रामीणों की मांग मानने के बजाय खबर प्रकाशित करने पर ही धारा 153 ए के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया गया था। इसी एफआइआर के खिलाफ पर्वतजन के संपादक शिवप्रसाद सेमवाल ने सुप्रीम कोर्ट मे अपील की थी।
जिस पर अब फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पर्वतजन के संपादक पर दर्ज एफआईआर खारिज की है ।
इसको सुप्रीम कोर्ट का उत्तराखंड में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामले में बड़ा फैसला माना जा सकता है।
लेख से सार्वजनिक सद्भाव प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया गया था। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि एफआइआर में लगाए गए आरोप अपीलकर्ता के खिलाफ संज्ञेय अपराध के जरूरी घटकों को खुलासा नहीं करते हैं।शीर्ष अदालत ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के जुलाई 2020 के आदेश के खिलाफ पर्वतजन के संपादक शिव प्रसाद सेमवाल की दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने आइपीसी की धारा 153ए के तहत अपराधों के लिए दर्ज एफआइआर को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था।पीठ ने कहा कि आइपीसी की धारा 153ए में स्पष्ट है कि इस प्रकार अपराध का गठन करने के लिए अभियोजन पक्ष को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आरोपित के लिए ‘बोले गए’ अथवा ‘लिखे’ शब्दों ने धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच मनमुटाव, या दुश्मनी पैदा हुई। अपमानजनक समाचार लेख को ध्यान से पढ़ने पर स्पष्ट है। कि लेख में किसी भी समूह या लोगों के समूह का कोई संदर्भ नहीं है।इस पूरे मामले में शिवप्रसाद सेमवाल ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “सत्य की हमेशा जीत होती है। षड्यंत्र करने वाले कितना भी षड्यंत्र कर लें, सत्य परेशान हो सकता है पराजित नही। त्रिवेंद्र सरकार में सिंगटाली पुल का स्थान परिवर्तन करने पर हमने एक खबर प्रकाशित की थी।इस पर त्रिवेंद्र सरकार ने हमारे खिलाफ दो समुदायों में झगड़ा कराने का” गुपचुप मुकदमा दर्ज कर दिया था और यह एफआईआर जानबूझकर छुपा दी गई थी, ताकि हमारे ऊपर गैंगस्टर लगाने में मदद मिल सके।यदि इस तरह के मुकदमे नहीं होते तो हम कभी पत्रकारिता से दो कदम आगे बढ़कर राजनीति में नहीं आते।

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