देहरादून: उत्तराखंड में आगामी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने जा रही है। यह राज्य निर्माण के बाद पहली बार वर्ष 2003 में अपनाई गई थी। उस समय मतदाताओं की संख्या लगभग 59 लाख थी, जो अब बढ़कर 85 लाख से अधिक हो चुकी है।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने बताया कि चुनाव आयोग का प्रारंभिक एसआईआर कार्यक्रम लगभग 66 प्रतिशत पूरा हो चुका है। हालांकि, मतदाताओं का सटीक आंकड़ा केवल फाइनल एसआईआर के बाद ही सामने आएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हर मतदाता तक पहुंच बनाना है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी योग्य मतदाता सूची से वंचित न रहे।
2003 की मतदाता सूची से सत्यापनइस बार की प्रक्रिया में खास बात यह है कि 2003 की मतदाता सूची को कट-ऑफ और लेगेसी डेटा मानकर वर्तमान मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। इस सत्यापन के दौरान यह स्पष्ट होगा कि राज्य में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है या किसी जिले में कमी दर्ज हुई है।
अभियान 66 फीसदी पूराप्रारंभिक एसआईआर का काम 66 फीसदी पूरा हो चुका है। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान न केवल मतदाता सूची की सटीकता बढ़ाएगा, बल्कि आगामी चुनावों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत करेगा। SIR अभियान पूरा होने के बाद राज्य में मतदाताओं की वास्तविक संख्या का पता चलेगा और इसके आधार पर आगामी चुनावों की तैयारी को गति दी जाएगी।
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