सशक्त लोकायुक्त गठन न होने पर RRP की सरकार को कड़ी चेतावनी: उपवास, रैली और आमरण अनशन का ऐलान – पर्वतजन

देहरादून, 20 दिसंबर 2025: उत्तराखंड में सशक्त लोकायुक्त की नियुक्ति की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (RRP) ने शुक्रवार को देहरादून प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। पार्टी ने राज्य सरकार पर चुनावी वादों से मुकरने और हाईकोर्ट के बार-बार के निर्देशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप लगाया। यदि जल्द ही सशक्त लोकायुक्त का गठन नहीं किया गया, तो पार्टी ने 4 जनवरी को घंटाघर स्थित स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी स्मारक पर एकदिवसीय उपवास, 11 जनवरी (क्रांति दिवस) को परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास तक विशाल रैली और 30 जनवरी 2026 से लोकायुक्त कार्यालय पर आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की। साथ ही प्रदेशव्यापी आंदोलन चलाने का ऐलान किया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन भी भेजा गया, जिसमें सशक्त लोकायुक्त के तत्काल गठन की मांग के साथ-साथ लोकायुक्त के नाम पर हो रहे अनावश्यक भारी खर्च को फौरन रोकने की अपील की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल, लोकायुक्त अभियान संयोजक परमानंद बलोदी, सुमन राम बडोनी, प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना ईष्टवाल सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया। इस मौके पर वन एवं पर्यावरण प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश ईष्टवाल, आरटीआई व मानवाधिकार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र कुमार तथा देहरादून जिला अध्यक्ष नवीन पंत आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

प्रमुख बयान:
शिव प्रसाद सेमवाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी):
“राज्य सरकार ने कई चुनावी घोषणा-पत्रों में सशक्त लोकायुक्त गठन का वादा किया था, लेकिन आज तक इसे पूरा नहीं किया। हाईकोर्ट ने बार-बार निर्देश दिए, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोकायुक्त कार्यालय के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन बिना लोकायुक्त के यह सब व्यर्थ है। हमने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है और मांग करते हैं कि तत्काल सशक्त एवं स्वतंत्र लोकायुक्त का गठन हो। अन्यथा 30 जनवरी से आमरण अनशन और प्रदेशव्यापी आंदोलन अपरिहार्य होगा। जनता भ्रष्टाचार से त्रस्त है, सरकार अब और बहाने नहीं बना सकती।”
परमानंद बलोदी (लोकायुक्त अभियान संयोजक):
“लोकायुक्त के नाम पर भवन, स्टाफ और वाहनों पर भारी खर्च हो रहा है, जो जनता के धन की बर्बादी है। यह पैसा भ्रष्टाचार रोकने में लगना चाहिए, न कि खाली कार्यालय चलाने में। सरकार की उदासीनता से भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है। हमारा आंदोलन अहिंसक होगा, लेकिन दृढ़ रहेगा।”
सुमन राम बडोनी:
“उत्तराखंड की जनता पारदर्शी शासन चाहती है। सशक्त लोकायुक्त के बिना जवाबदेही कैसे सुनिश्चित होगी? सरकार अपने वादे निभाए, वरना जनआंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।”
सुलोचना ईष्टवाल (प्रदेश अध्यक्ष):
“महिलाओं और आम नागरिकों पर भ्रष्टाचार का सबसे ज्यादा असर पड़ता है। पार्टी पूरे प्रदेश में इस मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाएगी। सरकार को चेतावनी है कि जनता की हताशा अब आंदोलन में बदल रही है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित कार्यकर्ताओं ने नारे लगाकर सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने अन्य सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर समर्थन की अपील की।
यह मुद्दा काफी समय से विवाद का विषय बना हुआ है, क्योंकि लोकायुक्त अधिनियम 2014 में पारित होने के बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। पार्टी का मानना है कि यह आंदोलन भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड के लिए निर्णायक साबित होगा।

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