हरिद्वार भूमि घोटाला मामले में आईएएस अधिकारियों का निलंबन बरकरार, बहाली पर निर्णय लंबित – पर्वतजन

उत्तराखंड के हरिद्वार नगर निगम से संबंधित कथित भूमि घोटाले के आरोप में निलंबित भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों को अभी कोई छूट नहीं दी गई है। शासन द्वारा उनके निलंबन की जांच की गई, लेकिन इस मुद्दे पर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकाला जा सका। उल्लेखनीय है कि इस जांच से एक दिन पूर्व ही कांग्रेस के राज्य प्रमुख ने इन अधिकारियों की संभावित वापसी को लेकर सरकार की मंशा पर संदेह जताया था।
 
यह घोटाला पिछले वर्ष 2025 में प्रकाश में आया था, जिसमें लगभग 57 करोड़ रुपये की नगर निगम की भूमि से जुड़ी अनियमितताओं का आरोप लगा। इस खुलासे से राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में उथल-पुथल मच गई। शासन ने तुरंत जांच शुरू कराई और आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह चौहान को इसकी कमान सौंपी गई। जांच के प्रारंभिक निष्कर्षों में गड़बड़ियां पाए जाने पर मुख्यमंत्री के आदेश से सख्त कदम उठाए गए।

 
इस मामले में तत्कालीन हरिद्वार जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह और नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त वरुण चौधरी को निलंबित किया गया। साथ ही, तत्कालीन उप जिलाधिकारी अजयवीर सिंह सहित नगर निगम के कई अन्य कर्मियों पर भी निलंबन की कार्रवाई हुई। चूंकि दोनों आईएएस अधिकारी अखिल भारतीय सेवा से जुड़े हैं, इसलिए उनके निलंबन की नियमित रूप से उच्च स्तर पर समीक्षा आवश्यक है।
 
अब इन अधिकारियों के निलंबन को करीब छह महीने होने वाले हैं, जिसके चलते शासन में उनकी वापसी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुख्य सचिव आनंद वर्धन की अगुवाई में हुई बैठक में इन निलंबित आईएएस अधिकारियों के मामले की पड़ताल की गई, लेकिन कोई निर्णायक फैसला नहीं लिया जा सका। ईटीवी भारत से हुई चर्चा में मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने भी इसकी पुष्टि की कि अभी इस विषय पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।
 
इस बीच, कांग्रेस के राज्य प्रमुख गणेश गोदियाल ने इन अधिकारियों की वापसी की अफवाहों को लेकर सरकार पर तीखे हमले किए थे। उन्होंने दावा किया कि सरकार बाहरी दबावों के कारण दोषी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रही है। गोदियाल के इन दावों के बाद हुई जांच बैठक को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। हालांकि, सभी अटकलों के बावजूद निलंबित आईएएस अधिकारियों को कोई लाभ नहीं मिला है और उनकी वापसी का फैसला स्थगित हो गया है। अब सभी की नजरें शासन के आगामी कदमों पर हैं कि इस चर्चित भूमि घोटाले में आगे क्या कार्यवाही होगी और निलंबित अधिकारियों के करियर पर कब अंतिम फैसला लिया जाएगा।

Sapna Rani

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