

डालकन्या भोलापुर के राजकीय इंटर कॉलेज में दो शिक्षकों के विवाद का मामला गरमाया; पत्नी ने पति को प्रताड़ित करने का लगाया आरोप, निष्पक्ष जांच और तत्काल हस्तक्षेप की मांग
नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के राजकीय इंटर कॉलेज डालकन्या भोलापुर में दो शिक्षकों के बीच हुआ विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हिंदी प्रवक्ता डॉ. मुरली मनोहर भट्ट की पत्नी ने आरोप लगाया है कि जांच और पूछताछ के नाम पर उनके पति को प्रताड़ित एवं अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने अपने तीन बच्चों के साथ आत्मदाह करने की चेतावनी दी है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
जांच पूरी होने तक दूसरे विद्यालय में तैनाती
जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर को विद्यालय में दो शिक्षकों के बीच विवाद हुआ था। मामले की जांच पूरी होने तक हिंदी प्रवक्ता डॉ. मुरली मनोहर भट्ट को राजकीय इंटर कॉलेज पतलोट में तैनात किया गया है। वहीं, विभाग ने प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी उप शिक्षा अधिकारी को सौंपी है।
इस बीच डॉ. भट्ट की पत्नी ने विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि उनके पति के साथ अनुचित व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने 23 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे खंड शिक्षा कार्यालय में अपने तीन बच्चों के साथ आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी। उनकी शिकायत और चेतावनी को देखते हुए प्रशासन तथा शिक्षा विभाग की तत्काल पहल जरूरी है।
ग्रामीणों ने बताईं शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, डॉ. मुरली मनोहर भट्ट पिछले करीब 20 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने लगभग 15 वर्षों तक क्षेत्र के युवाओं को निशुल्क कोचिंग भी दी, जिससे करीब 650 बच्चों को सरकारी पदों पर चयनित होने में मदद मिली।
हालांकि, शिक्षक के योगदान से जुड़े इन दावों और मौजूदा विवाद में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। पूरे मामले में सभी संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना और तथ्यों के आधार पर जांच होना महत्वपूर्ण है।
निष्पक्ष जांच के साथ परिवार की सुरक्षा भी जरूरी
विद्यालय में शिक्षकों के बीच हुए विवाद और उसके बाद सामने आए आरोपों की निष्पक्ष, पारदर्शी तथा समयबद्ध जांच होनी चाहिए। किसी भी पक्ष को दोषी ठहराने से पहले तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल जरूरी है। साथ ही, डॉ. भट्ट की पत्नी की शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए प्रशासन को परिवार से तत्काल संवाद स्थापित करना चाहिए।
इस मामले में सबसे बड़ी प्राथमिकता किसी भी अप्रिय घटना को रोकना और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आत्मदाह की चेतावनी को केवल विवाद का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारी तत्काल हस्तक्षेप करें, परिवार को सुरक्षित रखें और जांच प्रक्रिया के संबंध में स्पष्ट जानकारी दें।
जनहित की मांग: निष्पक्ष जांच हो, सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर मिले और किसी भी व्यक्ति या परिवार के साथ अन्याय न हो।
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