देहरादून: उत्तराखंड में अगस्त महीने में प्रदेश के तमाम क्षेत्रों में आई आपदा ना सिर्फ राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी, बल्कि भविष्य में इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक बड़ा रास्ता भी खोल दिया है. क्योंकि उत्तराखंड सरकार ने धराली के बाद अब थराली और पौड़ी क्षेत्र में आई आपदा के वजहों का अध्ययन करने का निर्णय लिया है. संभावना जताई जा रही है कि इस अध्ययन से ना सिर्फ आपदा के असल वजहों की जानकारी मिलेगी, बल्कि भविष्य में इस तरह के आपदा आने से पहले अनुमान लगाया जा सकेगा.
आपदा ने बरपाया कहर: उत्तराखंड में मानसून सीजन के दौरान आपदा जैसी स्थिति बनती रहती है. इसी क्रम में साल 2025 में प्राकृतिक आपदा का कहर रहा, जिससे जानमाल को काफी नुकसान पहुंचा है. यह सभी बड़ी घटनाएं अगस्त महीने में ही हुई हैं. जिसमें धराली, पौड़ी और थराली क्षेत्र में आई आपदा शामिल है. उत्तराखंड में लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए अब उत्तराखंड सरकार अध्ययन पर विशेष जोर दे रही है. जिसके तहत धराली क्षेत्र में आई आपदा के असल वजहों को जानने के लिए विशेषज्ञों की ओर से अध्ययन कराया गया था तो वहीं अब सरकार पौड़ी और थराली क्षेत्र में भी आई आपदा के वजह को जानने के लिए अध्ययन करने जा रही है.
आपदाओं पर विशेषज्ञों की टीम करेगी अध्ययनआपदा का अध्ययन करेगी टीम: उत्तराखंड की पौड़ी जिले में 6 अगस्त को और चमोली जिले के थराली में 22 अगस्त को प्राकृतिक आपदा थी. ऐसे में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन विभाग को इन आपदाओं के कारणों का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की टीम तैयार कर प्रभावित क्षेत्रों में भेजने के निर्देश दिए थे, ताकि धराली की तरह ही थराली में आई आपदा का व्यापक सर्वेक्षण करते हुए ये पता लगाया जा सके कि हिमालयी क्षेत्रों में इस तरह ही घटनाएं क्यों घट रही हैं. साथ ही मलबा क्यों और कैसे पानी के साथ बहकर नीचे आ रहा है. ऐसे में आपदा प्रबंधन विभाग ने थराली आपदा की अध्ययन के लिए विशेषज्ञों की टीम गठित कर दी है जो 28 अगस्त यानि आज अध्ययन करने के लिए रवाना हो जाएगी.
सुझावों के आधार पर होगा काम: थराली में आई प्राकृतिक आपदा के असल वजहों को जानने के लिए गठित टीम में उत्तराखंड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र, वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान, भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण, रुड़की स्थित राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, केन्द्रीय जल आयोग और सिंचाई विभाग के विशेषज्ञ अध्ययन के लिए रवाना हो रही हैं. विशेषज्ञों की ये टीम नगर पंचायत थराली के राडीबगड़ में तहसील कार्यालय, तहसील के आवासीय परिसर, कोटडीप, थराली बाजार, चैपडों एवं सगवाडा में बाढ़, भूस्खलन के कारणों का अध्ययन करेंगे. साथ ही न्यूनीकरण (Reduction) का उपाय भी सुझाएंगे. ताकि भविष्य में इस तरह की आपदा के दौरान अध्ययन रिपोर्ट का इस्तेमाल किया जा सके.
विशेषज्ञ से अध्ययन करने का मुख्य उद्देश्य यही है कि आपदा के कारण क्या है, भविष्य में अगर इस तरह की परिस्थितियों बनती हैं तो क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके. इसके अलावा भविष्य में इस तरह की परिस्थितियों कहां-कहां बन सकती हैं, उन क्षेत्रों में पहले से ही क्या प्रभावी कार्रवाई की जानी है, ताकि इस तरह की घटनाएं होने से पहले ही बचाव किया जा सके. इसके लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित की गई है और यह कमेटी प्रभावित क्षेत्रों में अध्ययन के लिए रवाना होगी.विनोद कुमार सुमन, आपदा प्रबंधन सचिव
रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई: ऐसे में एक्सपर्ट कमेटी ग्राउंड जीरो पर जाकर अध्ययन करेंगे और रिपोर्ट के साथ ही अपने सुझाव भी शासन को सौंपेगी. जिस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. साथ ही बताया कि कमेटी की ओर से अध्ययन करने और उसका रिपोर्ट तैयार करने के लिए कोई समयबद्धता नहीं रखी गई है. क्योंकि अभी इसकी जानकारी नहीं है कि प्रभावित क्षेत्रों में किस-किस तरह के अध्ययन किए जाने हैं. अध्ययन के लिए किस-किस जगह पर विकसित करना पड़ेगा, जिस वजह से अध्ययन करने और रिपोर्ट के लिए समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
उत्तरकाशी धराली आपदाआपदा प्रबंधन सचिव ने कहा कहा: आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से पहले भी कई बार अध्ययन कराए गए हैं. लेकिन अध्ययन रिपोर्ट आने के बावजूद भी उस पर कोई कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई, जिसके सवाल पर आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि कुछ अध्ययन होते हैं जो आपदा प्रबंधन विभाग के लिए यूजफुल होते हैं. लेकिन बहुत सारे अध्ययन ऐसे होते हैं जो किसी घटना विशेष के लिए होते हैं. जिसके चलते उसकी रेलीवेंसी भविष्य में खत्म हो जाती है. लेकिन अगर कोई भी ऐसा अध्ययन जिनका भविष्य में लाभ लिया जा सकता है, उस तरह के अध्ययन को दरकिनार नहीं जाता है, बल्कि उस पर कार्रवाई की जाती है. साथ ही विशेषज्ञों की टीम को भेजे जाने का उद्देश्य यही है कि परिस्थितियों का आकलन करें, साथ ही इस तरह की परिस्थितियों प्रदेश के किन क्षेत्रों में हो सकती हैं, उसका विस्तृत रूप से अध्ययन किया जाए, ताकि रिपोर्ट के आधार पर उपायों पर काम किया जा सके.
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