देहरादून में साइबर ठगों का आतंक: तीन अलग-अलग मामलों में लाखों की ठगी, पुलिस ने दर्ज किए मुकदमे – पर्वतजन

देहरादून। साइबर अपराधियों की बढ़ती सक्रियता ने एक बार फिर लोगों को निशाना बनाया है। हाल ही में तीन अलग-अलग मामलों में ठगों ने निवेश के लालच और डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की है। इन घटनाओं में एक बुजुर्ग, एक इंजीनियर और एक व्यापारी पीड़ित बने हैं। सभी मामलों में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है।
 
पहले मामले में टिहरी जिले के एक व्यापारी ने शिकायत की कि 22 अक्टूबर को उन्हें सोशल मीडिया पर एक महिला से मित्रता अनुरोध प्राप्त हुआ। अनुरोध स्वीकार करने के बाद दोनों के बीच मैसेंजर पर बातचीत शुरू हुई। अगले दिन महिला ने मोबाइल नंबर मांगा और व्हाट्सएप पर संवाद जारी रखा। 23 अक्टूबर से 6 नवंबर तक बातचीत होती रही। इसके बाद 6 नवंबर को महिला ने ट्रेडिंग की जानकारी दी और पंजीकरण के लिए एक लिंक भेजा। उसी दिन हर्ष यादव नाम के खाते का विवरण साझा किया गया।

 
व्यापारी को शुरुआत में छोटी राशि जमा करने पर लाभ दिखाया गया, जिससे विश्वास बढ़ा। 6 नवंबर से 30 दिसंबर तक ठगों ने विभिन्न खातों में कुल 99 लाख 21 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए। जब पीड़ित ने राशि निकालने की कोशिश की तो और धन जमा करने की मांग की गई। अंत में महिला ने संपर्क तोड़ दिया, तब ठगी का पता चला।
 
दूसरे मामले में हरिद्वार के शांतिकुंज में कार्यरत इंजीनियर आदित्य कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई। 16 सितंबर को विक्रम सिंह नाम के व्यक्ति ने व्हाट्सएप कॉल पर खुद को नाका सॉल्यूशन कंपनी का सह-भागीदार बताया। निवेश के प्रस्ताव के साथ छोटे कार्य सौंपे गए, जिसमें शुरुआती लाभ दिखाया गया। बाद में प्रशिक्षण के नाम पर बड़ा मुनाफा प्रदर्शित किया गया। निकासी की कोशिश पर विभिन्न शुल्क के बहाने 4 लाख 89 हजार रुपये अतिरिक्त जमा करवाए गए। कुल मिलाकर ठगों ने 90.78 लाख रुपये हड़प लिए और फिर संपर्क विच्छेद कर दिया।
 
तीसरा मामला डिजिटल अरेस्ट का है, जिसमें तपोवन रायपुर निवासी 85 वर्षीय राजकुमार पीड़ित हुए। वे निर्यात व्यवसाय से जुड़े हैं। 22 अक्टूबर को एक अज्ञात कॉल पर खुद को बीएसएनएल कर्मचारी बताने वाले व्यक्ति ने नंबर बंद करने की बात कही। कॉल को आगे मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी से जोड़ा गया, जिसने आधार कार्ड के दुरुपयोग और बैंक खाता खोलने का आरोप लगाया।
 
ठगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर मुकदमा और गिरफ्तारी की धमकी दी। 22 अक्टूबर से 4 नवंबर तक पीड़ित को निरंतर निगरानी में रखा गया। विभिन्न खातों में राशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। 19 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच कुल 68 लाख रुपये स्थानांतरित किए गए। 4 नवंबर को फर्जी पुलिस क्लियरेंस प्रमाणपत्र भेजकर धन वापसी का आश्वासन दिया गया, लेकिन संपर्क टूटने पर ठगी सामने आई।
 
साइबर एएसपी कुश मिश्रा ने बताया कि तीनों प्रकरणों में अज्ञात ठगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस टीम जांच में जुटी हुई है और जल्द आरोपियों तक पहुंचने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में सतर्कता जरूरी है, क्योंकि ठग मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर पीड़ितों को नियंत्रित करते हैं।

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