उत्तराखंड का भी दिल्ली-नोएडा जैसा हाल, देहरादून की हवा हुई जहरीली, सांस लेना हुआ मुश्किल, इतना पहुंचा AQI – myuttarakhandnews.com

देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बढ़ते प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है. देहरादून कभी अपनी स्वच्छ आबोहवा के लिए जाना जाता था, जो इन दिनों प्रदूषण की मार झेल रहा है. ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, देहरादून का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में 200 के पार और कुछ संवेदनशील केंद्रों (जैसे दून यूनिवर्सिटी क्षेत्र) पर 300 के करीब दर्ज किया गया है. लंबे समय से बारिश न होने के कारण धूल के कण और धुआं वायुमंडल की निचली सतह पर जम गए हैं. धुंध और स्मॉग की वजह से सांस के रोगियों, बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही है. शुष्क मौसम और वातावरण में प्रदूषण के कण सांस संबंधित बीमारियों को ट्रिगर्ड कर देते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, प्रदूषण का सबसे ज्यादा खतरा सांस के मरीजों को होता है. सीओपीडी के मरीज हो या अस्थमा के मरीज सबके लिए यह स्थिति घुटन पैदा कर सकती है.
स्मॉग की चादर में लिपटी ‘दून घाटी’अपनी शुद्ध हवा और हसीन वादियों के लिए प्रसिद्ध ‘दून घाटी’ अब स्मॉग की चादर में लिपटी हुई है. पिछले 10 दिनों से शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) लगातार 200 के खतरनाक स्तर के आसपास रहा है, जिसने दूनवासियों की सेहत पर संकट खड़ा कर दिया है. इतना ही नहीं देहरादून के प्रमुख इलाकों में ‘रेड जोन’ जैसे हालात ताजा आंकड़ों के अनुसार, देहरादून के कई रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक बना हुआ है. दून यूनिवर्सिटी क्षेत्र जैसे संवेदनशील केंद्रों पर AQI 300 के करीब पहुंच चुका है.
क्या हैं प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण ?बारिश का अभाव भी इसका मुख्य कारण हो सकता है क्योंकि लंबे समय से शुष्क मौसम के कारण धूल के कण हवा में नीचे जमे हुए हैं. वहीं ठंडी हवा भारी होकर प्रदूषण के कणों और धुएं को वायुमंडल की निचली सतह पर रोक रही है. देहरादून में चल रहे निर्माण कार्यों से उड़ती धूल और वाहनों का धुआं स्मॉग को और गहरा कर रहा है जिससे यह समस्या ज्यादा बढ़ रही है.
अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की भीड़दून अस्पताल के छाती रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अनुराग अग्रवाल ने बताया कि देहरादून में लगातार कंस्ट्रक्शन चलता रहता है और वही शुष्क मौसम होने के चलते धूल के कण तो वातावरण में रहते ही हैं, इसके साथ अब प्रदूषण के कण भी वायु को खतरनाक बना रहे हैं. जो लोग सीओपीडी और अस्थमा जैसी बीमारी से पहले ही जूझ रहे हैं उनके लिए सांस लेने में दिक्कत होना, घुटन होना जैसी समस्याएं हो सकती है इसलिए उन्हें इस तरह की हवा में नहीं जाना चाहिए. अपनी दवाइयां हमेशा लेनी चाहिए. पर्याप्त की मात्रा में पानी और सही डाइट का ध्यान रखना चाहिए. बाहर अगर जाएं तो मास्क जरूर लगाएं.जब तक धुंध छंट न जाए, तब तक सुबह और देर शाम बाहर व्यायाम करने से बचें और अगर सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी या सीने में भारीपन महसूस हो, तो तुरंत विशेषज्ञ को दिखाएं. प्रदूषण के इस बढ़ते ग्राफ ने सीधे तौर पर लोगों के फेफड़ों पर हमला बोला है. दून अस्पताल सहित शहर के प्रमुख चिकित्सा केंद्रों में सांस के मरीजों की संख्या में 20% से 30% का इजाफा देखा जा रहा है.

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