विधानसभा के विशेष सत्र में बोले मुख्यमंत्री, महिलाओं को 33% आरक्षण दिलाने के लिए सर्वसम्मति से संकल्प का आह्वान
देहरादून, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठने की अपील करते हुए कहा कि मातृशक्ति को उनका अधिकार दिलाने के प्रयासों में किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। वे विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान- लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित कर रहे थे, जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए आयोजित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले इस विधेयक को शीघ्र लागू करने के लिए सदन से सर्वसम्मति से संकल्प पारित करने का प्रस्ताव रखा।
अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की ऐतिहासिक महिला विभूतियों—गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, मंगला देवी, हंसा धनाई, सरला बहन, बेलमती चौहान, सुशीला बहन और कमला पंत—को नमन किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप माना गया है और आज नारी केवल सहभागिता तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2023 में लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ नीति-निर्माण में उनकी भूमिका सुनिश्चित करने वाला युगांतकारी कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने इस ऐतिहासिक पहल को संसद में पारित नहीं होने दिया और अब जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बीते वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ”, “सुकन्या समृद्धि योजना” और “प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना” जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं और बालिकाओं के जीवन स्तर में सुधार हुआ है। साथ ही तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को सामाजिक न्याय दिलाया गया है।
राज्य सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड में जेंडर बजट में वृद्धि की गई है और महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 2.65 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बन चुकी हैं और सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण भी लागू है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर महिलाओं को कई सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति दिलाई गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार अवश्य मिलेगा।
अंत में मुख्यमंत्री ने विपक्ष से अपील की कि महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सकारात्मक सहयोग दें, ताकि लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी और अधिक मजबूत हो सके।
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