उत्तराखंड भाजपा में एक बार फिर उठापटक मच गई है। पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी ने पार्टी से इस्तीफा देकर न केवल संगठन में हलचल पैदा की है, बल्कि अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए गहरा अफसोस भी जताया है। कोठारी ने अपनी पोस्ट में लिखा:
“काश: मेरा इस्तीफा दिनांक 16-01-2025 को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री महेंद्र भट्ट जी द्वारा स्वीकार कर लिया गया होता, मैं निर्दलीय मेयर प्रत्याशी को हजारों मतों से विजयी बनाने में मदद कर सकता था।
मुझसे यह बड़ी चूक हो गई है, ऐसा प्रतीत होता है।
उत्तराखंड के पूर्व राज्य मंत्री भगत राम कोठारी ने पर्वतजन से विशेष बातचीत में इस वर्ष भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से इस्तीफा देने के पीछे के कारणों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कोठारी का भाजपा से मोहभंग काफी समय से चल रहा था, जो पार्टी की गतिविधियों और निर्णयों में लगातार दिख रही विसंगतियों से उपजा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बताया कि 1997 में गोपेश्वर नगर पालिका अध्यक्ष चुने जाने के बाद से उन्होंने पार्टी के लिए कठिन परिस्थितियों में भी अथक परिश्रम किया। चुनाव लड़ना, जमीनी स्तर पर संगठन खड़ा करना, व्यक्तिगत जोखिम उठाना – इन सबमें उन्होंने पार्टी को प्राथमिकता दी। “स्थानीय पार्षद से लेकर राज्य मंत्री तक के विभिन्न पदों पर मैंने भाजपा के हितों को अपने हितों से ऊपर रखा,” उन्होंने कहा।
इस्तीफे का एक प्रमुख कारण हाल के मेयर चुनावों के दौरान देखी गई प्रवृत्ति रही। कोठारी ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बाहरी लोगों को मेयर बनाने की बढ़ती प्रथा ने उन्हें बहुत आहत किया। “हमारे पर्वतीय राज्यों में गैर-स्थानीय लोगों को नेतृत्व सौंपना स्थानीय पहाड़ी समुदायों की भावनाओं के विपरीत है। इससे उन लोगों का प्रतिनिधित्व कमजोर होता है जो क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों को समझते हैं,” उन्होंने कहा। पार्टी के मूल मूल्यों से यह दूरी भी उनके विश्वास को लगातार कम करती रही।
इस्तीफे का निर्णायक कारण अंकिता भंडारी हत्याकांड रहा, जो आज भी उत्तराखंड की राजनीति को झकझोर रहा है। पौड़ी गढ़वाल की युवा रिसेप्शनिस्ट अंकिता की 2022 में हुई हत्या के मुख्य आरोपी एक पूर्व भाजपा नेता के बेटे से जुड़े होने के बावजूद मामले में न्याय नहीं मिल सका। कोठारी ने भावुक होकर कहा, “अंकिता हमारी बेटी है। राज्य में महिलाओं की असुरक्षा का यह प्रतीक है। मैंने इसके लिए लगातार न्याय की आवाज उठाई, समाचारों के माध्यम से जागरूकता फैलाई।” लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने राजनीतिक सुविधा को प्राथमिकता देते हुए इस मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं की। यही वह अंतिम बिंदु था जिसने दशकों की सेवा के बाद भाजपा से नाता तोड़ने का मन बना दिया।
अपने राजनीतिक सफर पर नजर डालते हुए कोठारी ने बताया कि 2017 में विधानसभा टिकट मिलने के बाद उसे वापस ले लिया गया था। दीप शर्मा जैसे भ्रष्टाचार एवं उत्पीड़न मामलों को भी उन्होंने उजागर किया। “मैंने पारदर्शिता और न्याय के लिए संघर्ष किया, लेकिन कहीं न कहीं पार्टी की दिशा बदल गई,” उन्होंने कहा।
अब स्वतंत्र रूप से सक्रिय कोठारी ने संकेत दिया कि भविष्य में वे महिलाओं की सुरक्षा, स्थानीय सशक्तिकरण और क्षेत्रीय विकास जैसे जमीनी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। गौरतलब है कि भाजपा हाई कमान से दबाव के तुरंत बाद भगत राम कोठारी ने यह पोस्ट फेसबुक डिलीट कर दी।
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