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शून्य छात्र संख्या से बंद होने वाला था उत्तराखंड का ये सरकारी स्कूल, फिर हुआ चमत्कार – myuttarakhandnews.com

बागेश्वर: उत्तराखंड में पिछले पांच वर्षों में शून्य छात्र संख्या के कारण 826 प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुके हैं. इन स्कूलों के बंद होने के पीछे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन और घटती छात्र संख्या प्रमुख कारण बताए गए हैं. बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील में स्थित गोलना गांव का राजकीय प्राथमिक विद्यालय भी छात्र संख्या शून्य होने के कारण बंद होने की कगार पर था. लेकिन यहां के ग्रामीणों की जागरूकता ने विद्यालय को बंद होने से बचा लिया.
बागेश्वर का गोलना प्राथमिक विद्यालय फिर हुआ शुरू: उत्तराखंड के दूरस्थ बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील स्थित गोलना गांव का राजकीय प्राथमिक विद्यालय बंद होने की कगार पर था. छात्र संख्या शून्य होने के बाद ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों के सामूहिक प्रयास से विद्यालय में फिर से रौनक लौट आई है. पिछले चार वर्षों से यह विद्यालय केवल एक छात्रा के भरोसे चल रहा था. इस वर्ष उस छात्रा के कक्षा 5 उत्तीर्ण करने के बाद विद्यालय पूरी तरह छात्रविहीन हो गया था. इससे इस विद्यालय के बंद होने का खतरा मंडरा रहा था.
बंद होने की कगार पर पहुंचकर इस स्कूल ने की वापसीगांव के लोगों ने सरकारी स्कूल के दिया नवजीवन: गांव के ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई. ग्राम प्रधान ज्योति शाही, सामाजिक कार्यकर्ता कमल शाही और स्थानीय अभिभावकों ने विद्यालय को बंद न होने देने का संकल्प लिया. शिक्षा के महत्व को समझते हुए उन्होंने अपने बच्चों का नामांकन इसी प्राथमिक विद्यालय में कराना शुरू किया. इस सामूहिक पहल का सकारात्मक परिणाम सामने आया. कुछ समय पहले तक जहां विद्यालय में सन्नाटा था, वहीं अब 10 बच्चों का नामांकन हो चुका है. इससे विद्यालय में फिर से चहल-पहल लौट आई है. इसके अतिरिक्त, आने वाले समय में 5 और बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया जारी है, जिससे विद्यालय के और मजबूत होने की उम्मीद है.
अभिभावकों ने की अपील: अभिभावक खष्टी शाही ने कहा कि-
ये हम सब की जिम्मेदारी है कि अपने इलाकों के सरकारी स्कूलों को बंद नहीं होने दें. मैं दो किलोमीटर दूर से अपने बच्चो को यहां पढ़ाने भेज रही हूं. मेरी अन्य अभिभावकों से भी अपील है कि वो भी सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाएं.-खष्टी शाही, अभिभावक-
प्रधानाध्यापिका ने अभिभावकों की पहल को सराहा: विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मुन्नी गड़िया ने इस प्रयास की सराहना की है. उन्होंने कहा कि- यह समाज की एकजुटता और शिक्षा के प्रति जागरूकता का प्रतीक है. हमारी अन्य अभिभावकों से भी अपील है कि वे अपने बच्चों को नजदीकी सरकारी विद्यालयों में भेजकर शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में योगदान दें.
-मुन्नी गड़िया, प्रधानाध्यापिका, गोलना राजकीय प्राथमिक विद्यालय-
बंद होने से बच गया गोलना का प्राथमिक विद्यालय: गोलना गांव की यह पहल केवल एक विद्यालय के पुनर्जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि समाज संगठित होकर किसी भी समस्या का समाधान कर सकता है. यह घटना उन अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जहां सरकारी स्कूल छात्र संख्या के अभाव में बंद होने की कगार पर हैं. आज गोलना का स्कूल सरकारी स्कूलों औय जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, जिस तरह ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से एक बार फिर स्कूल शुरू हो गया है.

Nandni sharma

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