नदी में बिछाई 26 लाख की टाइलें। मरघट के रास्ते में ‘घपले’ की बदबू
नीरज उत्तराखंडी , पुरोला
प्रखंड पुरोला के घुंडाड़ा गांव में स्पेशल कंपोनेंट प्लान के अंतर्गत कराए जा रहे मरघट के सार्वजनिक रास्ते के निर्माण में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। तहसील मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर इस गांव में किए जा रहे निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
जानकारी के अनुसार, लघु सिंचाई विभाग द्वारा लगभग 26 लाख रुपये की लागत से गांव से कमल नदी के घाट तक दीवार (रिटेनिंग वॉल) और इंटरलॉकिंग रास्ता बनाया जाना था, जिससे दर्जनों गांवों के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए सुगम मार्ग मिल सके। लेकिन हकीकत में जो निर्माण हुआ, उसने पूरे प्रोजेक्ट पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने घुंडाड़ा गांव के नीचे कमल नदी पुल के पास, मरघट स्थल पर वर्षों पहले सिंचाई विभाग द्वारा भरे गए कॉलम के ऊपर बिना दीवार और खंडजा डाले सीधे इंटरलॉकिंग टाइल बिछा दीं। इससे न केवल तकनीकी मानकों की अनदेखी हुई, बल्कि लाखों रुपये की धनराशि भी बर्बाद हो गई।
सबसे गंभीर बात यह है कि जिस स्थान पर टाइलें बिछाई गई हैं, वह बरसात के समय नदी के तेज बहाव में पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। ऐसे में वहां इस तरह का निर्माण करना पूरी तरह अव्यवहारिक और गैर-जिम्मेदाराना माना जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिना स्थल निरीक्षण और तकनीकी मूल्यांकन के ही कार्य कर दिया गया, जिससे सरकारी धन “नदी में बहाने” जैसा काम हुआ है।
ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण को सरकारी धन का दुरुपयोग बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
क्या कहते हैं अधिकारी?
लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता विपिन चौहान ने बताया कि घुंडाड़ा में एससीपी योजना अंतर्गत वर्ष 2022-23में 26 लाख रुपए लागत की योजना स्वीकृत हुई थी, जिसके अंतर्गत 500-600 मीटर रास्ते का निर्माण व इंटर लॉकिंग टाइल्स बिछाईं जानी थी योजना अंतर्गत 250 मीटर का काम पूरा कर लिया गया है और उनके चार्ज लेने से पहले योजना अंतर्गत 9 लाख रूपये का भुगतान किया जा चुका था और उनके द्वारा वर्तमान समय तक लगभग 3 लाख का भुगतान किया गया है उन्होंने स्पष्ट किया कि नदी के भीतर किए गए कार्य को रोकने के निर्देश पहले ही दे दिए गए हैं और उस हिस्से का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि क्या इस मामले में जिम्मेदारों पर कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।
