World’s Sparrow Day: श्याद हम सभी ने एक नन्ही सी चिड़िया तो देखी ही होगी , बचपन में घर आंगन में खेलती नन्ही सी वो चिड़िया सभी को याद होगी । लेकिन जैसे जैसे आधुनिकता की दौड़ में इंसान दौड़ते रहे , खुले आसमानों और हरियाली की जगह कंक्रीट के जंगलों ने ले ली तो ये मासूम सी चिड़िया खोती गयी , नाम है गौरेया !!इसलिए इस नन्ही चिड़िया को बचाने के लिये हर साल 20 मार्च के दिन विश्व गौरेया दिवस मनाया जाता है । नेचर फोरेवर सोसाइटी (भारत) और इको-सिस एक्शन फ़ाउंडेशन (फ्रांस) के मिले जुले प्रयास के कारण 12 साल पहलेWorld’s Sparrow Day मनाने की शुरुआत हुई थी ।मनाया जाता है।
गौरैया को हाउस स्पैरो भी कहा जाता है। ये मानव और प्रकृति के लिए उपयोगी है, क्योंकि यह कीड़ों को खाती है, जिससे कीड़े पौधों को नुकसान नहीं पहुंचा पाते ।घरेलू गौरैयों के अलावा गौरैया की अन्य 26 विशिष्ट प्रजातियाँ हैं।ये सभी प्रजातियाँ तीन महाद्वीपों अर्थात् एशिया, अफ्रीका और यूरोप में पाई जाती हैं।
सिर्फ गौरेया ही नहीं बल्कि अन्य पक्षियों की विलुप्ति के लिये कहीं ना कही कंक्रीट के जंगल है ।जब दिल्ली जैसे महानगर में गौरेया चिड़िया विलुप्त होने की कगार पर थी तब 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गौरेया के संरक्षण के लिए इसे राजकीय पक्षी घोषित किया था ।इसके बाद दिल्ली के राजकीय पक्षी गौरया के संरक्षण के लिए स्पैरो नाम से कई मुहिम शुरू की गई।लोगों से अपील की जाती है कि घर की बालकोनी ,छतों में इनके लिए पानी रखें ,दाना रखें , इनके लिये लकड़ी के घोंसले भी आते है यदि वो मौजूद ना हो तो जुट के रेडीमेड घोंसले घरों में मजबूती से लगाये ,ताकि ये चहचहाना जारी रखें ।इनकी ये विशेषता भी है कि ये आसपास ज्यादा गंदगी नहीं फैलाती ना ही किसी चीज को नुकसान करती है ।इनके घोसलों को बाज जैसी शिकारी पक्षी की नजरों से बचाना जरूरी होता है ।
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