
उत्तराखंड में पर्यटन का सीजन अपने चरम पर है, और चारधाम यात्रा भी लगातार जारी है. मगर, इस बार श्रद्धालुओं और सैलानियों की जेब पर महंगाई की दोहरी मार पड़ रही है. एक तरफ पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें, तो दूसरी तरफ होटल और टैक्सी कारोबारियों ने भी अपने दाम बढ़ा दिए हैं. आम यात्री परेशान है और सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी है.”
दरअसल, देवभूमि उत्तराखंड में पिछले कुछ हफ्तों में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में लगातार उछाल आया है. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ा है. टैक्सी संचालकों का कहना है कि जब ईंधन महंगा होगा तो किराया बढ़ाना उनकी मजबूरी है. टैक्सी और होटल्स के किराए में बढ़ोत्तरी का सीधा असर अब लोगों की जेब पर पड़ रहा है.
टैक्सी किराए में 15 से 25 फीसदी तक बढ़ोत्तरीबता दें कि देहरादून से बद्रीनाथ, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब तक के टैक्सी किराये में 15 से 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है. हरिद्वार-ऋषिकेश से चारधाम तक जाने वाले यात्रियों को अब पहले से काफी ज्यादा रकम चुकानी पड़ रही है. होटल कारोबारियों ने भी अपने दाम बढ़ा दिए हैं. उनका तर्क है कि बिजली, खाना पकाने का गैस और सामान की ढुलाई, सब कुछ महंगा हो गया है. ऐसे में होटल चलाने की लागत बढ़ गई है और उसकी भरपाई के लिए रेट बढ़ाना जरूरी हो गया.
चारधाम यात्रा में उमड़ रहा आस्था का सैलाबउधर, उत्तराखंड के चारधाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ में इस बार आस्था का सैलाब उमड़ रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 अप्रैल को यात्रा के शुभारंभ से लेकर 23 मई तक कुल 20 लाख 76 हजार 553 तीर्थयात्री चारों धामों में माथा टेक चुके हैं. खास बात यह है कि इस बार बाबा केदार दरबार पर भोले के भक्तों का ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है. एक महीने के भीतर ही 8 लाख से अधिक भक्तों ने भगवान शिव के दरबार पर हाजिरी लगाई है.
