उत्तराखंड में ‘खेला’, हरियाणा में खलबली: कुमारी सैलजा ने एक साथ दी बीजेपी और हुड्डा गुट को टेंशन – myuttarakhandnews.com

नई दिल्‍ली. उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका देते हुए उसके कुछ नेताओं को अपने पाले में कर लिया है. उत्‍तराखंड की कांग्रेस प्रभारी कुमार सैलजा ने बीजेपी में सेंध लगाने में अहम भूमिका निभाई है. हरियाणा से सिरसा से सांसद सैलजा गांधी परिवार के बेहद करीब मानी जाती हैं. हरियाणा में भी वे कांग्रेस का सबसे बड़ा दलित और गैर-जाट चेहरा हैं. उत्‍तराखंड में उनके नेतृत्‍व में भाजपा में हुई ‘तोड़फोड़’ से अब साफ हो गया है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्‍व ने उन्‍हें ‘फ्री हैंड’ दिया है. इसका असर हरियाणा में भी होगा और उनका सबसे बड़े विरोधी पूर्व मुख्‍यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गुट असहज होगा.
उत्‍तराखंड में जिन बीजेपी नेताओं को सैलजा ने कांग्रेस में शामिल कराया है उनमें बीजेपी के टिकट पर दो बार के विधायक रहे राजकुमार ठुकराल सबसे बड़ा नाम है. ठुकराल के अलावा बीजेपी के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य भी कांग्रेस में शामिल हुए हैं. रुड़की के पूर्व मेयर गौरव गोयल ने भी बीजेपी का साथ छोड़ कांग्रेस का दामन थामा है और भीमताल के भाजपा नेता लखन सिंह अपनी पत्नी के साथ कांग्रेस मसूरी से अनुज गुप्ता भी कांग्रेसी हो गए हैं. बीजेपी के अलावा सैलजा ने बीएसपी में भी सेंध लगाई है. बहुजन समाज पार्टी के दो बार के विधायक नारायण पाल ने भी कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली है.
कुमारी सैलजा को राजनीति उनके पिता दलबीर सिंह से विरासत में मिली. वे हरियाणा के बड़े दलित नेता थे. कुमारी सैलजा हरियाणा से चार बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हो चुकी हैं. इसके अलावा वे दो बार राज्‍यसभा की सदस्‍य रह चुकी हैं. वर्तमान में वे हरियाणा की सिरसा लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं. उन्‍होंने यह चुनाव दो लाख से ज्‍यादा मतों से जीता था. कुमारी सैलजा हरियाणा कांग्रेस की अध्‍यक्ष भी रही हैं. वे नरसिम्‍हा राव और मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्र में मंत्री पद भी संभाल चुकी हैं. वर्तमान में वे कांग्रेस ही नहीं, बल्कि सभी दलों में हरियाणा का सबसे बड़ा दलित चेहरा हैं.
हरियाणा में साल 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में कुमारी सैलजा ने पूरा दमखम लगाया था. उन्‍हें कांग्रेस की ओर से मुख्‍यमंत्री पद का भी प्रबल दावेदार माना गया था. हालांकि, कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्‍व ने किसी को भी सीएम फेस घोषित नहीं किया था. विधानसभा चुनाव कांग्रेस हार गई. इसकी वजह कांग्रेस की अंदरूनी कलह को माना गया. कांग्रेस को 37 सीटें मिली जबकि भाजपा ने 48 सीट हासिल कर दोबारा सरकार बनाई. कांग्रेस की सीटें भले ही भाजपा से कम रही लेकिन वोट केवल एक फीसदी ही कम मिले. भाजपा को 38 फीसदी तो कांग्रेस को 37 फीसदी वोट मिले. एससी और ओबीसी वोटरों को कांग्रेस में वापस लाने में सैलजा के चेहरे ने अहम योगदान दिया.
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में चुनाव में सिरसा लोकसभा, जहां से कुमारी सैलजा सांसद है, वहां की 9 विधानसभा सीटों में से 6 पर कांग्रेस को जीत मिली. इसके अलावा अंबाला लोकसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस को अच्‍छा समर्थन मिला. अंबाला से सैलजा दो बार सांसद रह चुकी हैं.
उत्‍तराखंड के साथ हरियाणा में भी सक्रिय हैं सैलजासैलजा हरियाणा में खूब सक्रिय हैं. वे अपने लोकसभा क्षेत्र सिरसा के अलावा पूरे प्रदेश की समस्‍या को प्रमुखता से उठा रही हैं. राज्‍यसभा चुनाव में कुछ कांग्रेसी विधायकों की क्रॉस वोटिंग के बाद हरियाणा में हुड्डा गुट दबाव में है. वहीं, सैलजा की छवि एक निष्‍ठावान कांग्रेसी की है और वे हुड्डा के सबसे तगड़े विरोधी गुट का नेतृत्‍व कर रही हैं. दलित वर्ग से होने और कांग्रेस हाईकमान के बेहद नजदीक होने की वजह से वे हरियाणा में कांग्रेस का कद्दावर चेहरा बन चुकी हैं.
उत्‍तराखंड में अब कांग्रेस के पाले में बीजेपी के कद्दावर नेताओं को लाने से सैलजा का कद हाईकमान की नजरों में बढ़ा है. इसकी वजह है कि इतिहास के अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस को एक चुनावी जीत संजीवनी दे सकती है. इसलिए अब उत्‍तराखंड में पार्टी पूरा जोर लगा रही है और कमान सैलजा जैसी अनुभवी नेत्री को थमाई है. अगर उत्‍तराखंड में कांग्रेस अच्‍छा प्रदर्शन करती है तो नि:संदेह इसका फायदा सैलजा को होगा और हरियाणा में भी कांग्रेस उन्‍हें महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी देने से नहीं हिचकिचाएगी.
कोबरा, करैत, धामिन कुछ नहीं कर पाएंगे

Nandni sharma

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